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ग़ज़ल

Priti Surana June 27, 2017
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हर कोई जो काबिल होता
सबको सबकुछ हासिल होता

सुख ही सुख मिलता जीवन में
दुख न कभी भी दाखिल होता

अपनों की खुशियों की खातिर
कोई काम न बोझिल होता

सुख में देख किसी अपने को
सुख अपना भी शामिल होता

कोशिश बिन कुछ पाना चाहे
वो अकसर ही बुजदिल होता

साथ मुझे जो मिलता तेरा
मैं नौका तू साहिल होता

कठिन बहुत मनचाहा मिलना
वरना तू ही मंजिल होता

प्रीति सुराना

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3 Comments

  1. Nice कविता क्या शब्द हैं

    Reply
  2. “कठिन बहुत मनचाहा मिलना”
    अत्यंत सरल शब्दों में रचनाकार ने सत्य को उजागर किया है
    “कोशिश बिन कुछ पाना चाहे,वो अकसर ही बुजदिल होता”
    बेहद खूबसूरत ग़ज़ल
    साधुवाद प्रीति

    Reply
  3. बहुत अच्छा जी

    Reply

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