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हाल-ए-जिगर

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हाल-ए-जिगर

Priti Surana July 5, 2017
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कहाँ सुकूं है यहाँ सबको मयस्सर यारों
कुछ हवा कुछ पानी का है असर यारों..

घर की दीवारों पर लगी तस्वीरों ने कहा
कभी हमने भी काटी यहाँ दोपहर यारों..

सुनते नही यहां सब कहने के शौकीन है
इसलिए खामोशीे से बिता दी उमर यारों..

एक कटी पतंग के पीछे भागते बच्चे जैसे
जिंदगी है चंद ख्वाहिशों का सफ़र यारों…

उनसे मिलकर एकरोज हमको ऐसा लगा
हम खुद से रहे अब तक बेखबर यारों..

अपने ही लोग बेबसी का मजा लेते मिले
कभी बताकर जो देखा हाल-ए-जिगर यारों…

186/1752
@अनुराग©

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2 Comments

  1. Rajni Shinde July 6, 2017

    उनसे मिल कर एक रोज हमको ऐसा लगा
    हम खुद से रहे अब तक बेखबर यारों ।।।
    Incredibly Awesome…
    Spontaneous flow of pure feeling..

    God bless you.

    Reply
  2. Anurag July 9, 2017

    Thanks

    Reply

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