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धरती माँ

Priti Surana 1 year ago
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करते बात हम,
देश भक्ति की।
देते भाषण सभाओं में,
नारी शक्ति की।
मगर दोनों को सदा,
उपेक्षित हम करते।
एक को गाली कालेजों में ,
दूजे पर एसिड फेंकते!
ऐसा कैसी है तेरी,
देश भक्ति?
गद्दारों का विरोध करने का,
तुममें नहीं शक्ति!
एक पाँचों वक्त
धरती माँ को चूमता है।
दूजा खुलेआम
सबके सामने ही।
धरती पर मूतता है।।
माँ का आशीर्वाद!
बोलो किसे मिलेगा?
देश में कौन,
आगे और आगे बढेगा?
किसे मिलेगा श्राप,
कौन धरती पर घटेगा?
माँ को माँ कहने
भर से नही
बल्कि उसकी
सेवा-सुशुर्षा से ही,
तुमको मुक्ति मिलेगा।।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
(राम भवन चौरसिया )

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