LOADING

Type to search

धरती माँ

Uncategorized कविता

धरती माँ

Priti Surana July 5, 2017
Share

करते बात हम,
देश भक्ति की।
देते भाषण सभाओं में,
नारी शक्ति की।
मगर दोनों को सदा,
उपेक्षित हम करते।
एक को गाली कालेजों में ,
दूजे पर एसिड फेंकते!
ऐसा कैसी है तेरी,
देश भक्ति?
गद्दारों का विरोध करने का,
तुममें नहीं शक्ति!
एक पाँचों वक्त
धरती माँ को चूमता है।
दूजा खुलेआम
सबके सामने ही।
धरती पर मूतता है।।
माँ का आशीर्वाद!
बोलो किसे मिलेगा?
देश में कौन,
आगे और आगे बढेगा?
किसे मिलेगा श्राप,
कौन धरती पर घटेगा?
माँ को माँ कहने
भर से नही
बल्कि उसकी
सेवा-सुशुर्षा से ही,
तुमको मुक्ति मिलेगा।।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
(राम भवन चौरसिया )

Previous Article
Next Article

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Up