LOADING

Type to search

Uncategorized कविता

चाँद

Priti Surana 1 year ago
Share

प्रिये….
प्रीत ये तेरी मेरी
चाँद और चकोर सी

तुम आकाश निवासी
मैं *धरती *सी प्यासी

तुमसे सजते गीत मिलन के
मैं विरह गीत सुनाती

चाँद हो तुम मेरे
मैं क्यों हो गई चकोर तेरी

नैनो मे आश लिए
तकती हूँ मैं राह तुम्हारी

ऐसे निष्ठुर हो तुम चंदा
प्रीत न समझी मेरी

चाँद हो तुम मेरे
तुम बिन मैं आधी सी

नियति है ये प्रीत की मेरी
विरह वेदना से भरी

कि तुम हो चाँद मेरे
मैं हो गई चकोर तेरी…..

शिरीन भावसार
इंदौर (म. प्र.)
5.7.2017

Previous Article
Next Article

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *