LOADING

Type to search

बहती नदियां की धार बन तू

Uncategorized कविता

बहती नदियां की धार बन तू

Priti Surana July 5, 2017
Share

 

बहती नदियां की धार बन तू

जड़ चट्टानों सा ना भार बन तू

भारत माँ का तू वीर सपूत
माँ के गले का हार बन तू

भारत माँ को कोई छू ना सके
माँ रक्षा का प्रतिकार बन तू

जो देखे हमको बुरी नज़र से
तो कटे शीश का बाजार बन तू

छुड़ा दे छक्के देशद्रोही के
ऐसा तीखा प्रहार बन तू

दिखा दे तांडव दुश्मन की जमीं पे
शिव के त्रिशूल सा वार बन तू

हर अरमान को मारा जिसने
उस पत्नी का अभिसार बन तू

जोड़ दे महजब को एक सूत्र में
उस एकता का सूत्रधार बन तू

महके फलक तक जिसकी शहादत
ऐसी मौत का यार बन तू

स्वरचित

शीतल खंडेलवाल

2 Comments

  1. Shirin Bhavsar July 6, 2017

    Wahh…antim 4 panktiya behtrin

    Reply
  2. बेहतरीन सर्जन शीतल जी

    Reply

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *