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ये अंतरा परिवार एक जमीन ही तो है

Uncategorized कविता

ये अंतरा परिवार एक जमीन ही तो है

Priti Surana July 5, 2017
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*जमीन*

जी हाँ…
ये अंतरा परिवार
एक जमीन ही तो है !
जहाँ हर दिन
नये पौधे पल्लवित
होते रहते हैं !!

यहाँ मौजूद वट वृक्ष
जुटे हुए हैं,
इस धरातल को
मजबूत बनाने में !
ताकि आने वाली पीढी,
कठिन परिस्थितियों में भी
फ़ल फ़ूल सके !!

एक सुखद अनुभूति
मिलती है,
इनकी छांव में !
ठीक वैसी ही
जैसी एक शिष्य को
मिलती है,
गुरू के चरणों में !!

हमें नहीं पता कि,
हम इन वट वृक्षों की
तरह मजबूत
बन पाएंगे या नहीं !
आने वाली पीढी को,
कोई धरातल
दे पाएंगे या नहीं !!

पर इनको यकीन है
हम पर,
कि आने वाला समय
हमारा होगा !
इसीलिए जुटे हुए हैं
नि:स्वार्थ भाव से,
हमारी परवरिश में !!

*वट वृक्ष रूपी आप सभी गुणीजनों को*
*इस “मीत” का प्रणाम*

– आपका अपना
अमित अग्रवाल ‘मीत’

2 Comments

  1. Shirin Bhavsar July 6, 2017

    Sundar kavita…..bilkul sahi kha aapne Antra ke vishay mai.

    Reply
  2. बबुत सुन्दर रचना

    Reply

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