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सुख के सब साथी दुःख में न कोय

Priti Surana 1 year ago
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ये बात तो सच है की *सुख के सब साथी दुःख में न कोय* क्योंकि मैंने ये देखा भी है मैं किसी का नाम तो नहीं लिखूँगी पर ये एक सच्ची घटना है मेरी ही परिचित की ।
लड़के ने अपनी पसंद की लड़की से शादी की लड़की के माता पिता की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाकर भाग कर शादी की थी लड़के के माता पिता ने उन्हें स्वीकार कर लिया । लड़का अपनी पत्नी की हर ख़्वाहिश पूरी करता लड़की ज़रा शोकों थी उसे घूमना फिरना , अच्छे कपड़े पहना ऊँची सोसायटी में उठाना बैठना बहुत पसंद था । पत्नी की फ़रमाईश और उसको ख़ुश करने के चक्कर में वो ये भी भूल गया की उसकी इतनी चादर नहीं है जितने उसने पैर पसार लिए धीरे धीरे उसने अपने दोस्तों से पैसे लेना शुरू किया क़र्ज़ से वो गले तक लड़ चुका था । अब उसे कोई पैसे नहीं देता था उसने घर भी देर आना शुरू कर दिया था आए दिन पति पत्नी और माता पिता से कलह होने लगी क़र्ज़दार रोज़ घर पर खड़े हो जाते पर उसके पास कुछ था ही नहीं लौटाने के लिए वो थोड़े दिनों के लिए शहर से बाहर चला गया पर उसके दोस्तों ने ढूँढ निकाला उसे बहुत पीटा हाँथ पैर तोड़ दिए वो हॉस्पिटल पहुँच गया पर जिसके ख़ातिर उसने ये सब किया ये सब दर्द सहे उसी ने बोल दिया अब हम इनके साथ नहीं रह सकते और मायक़े जाकर बैठ गई
उस वक़्त जब की सबसे ज़्यादा ज़रूरत पति को पत्नी की होती है ऐसे नाज़ुक समय में ही पत्नी ने उसका साथ नहीं दिया पत्नी तो पति का बल होती है पर पत्नी ने बता दिया की *सुख के सब साथी दुःख में न कोय*………….

*अदिति रूसिया*

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