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“सुख के तो सब साथी दुख में न कोय”

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“सुख के तो सब साथी दुख में न कोय”

Priti Surana August 4, 2017
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अगर सूर्योदय होता है तो सूर्यास्त भी होता है कभी मनुष्य ऊपर उठता है तो कभी नीचे गिरता है इसे प्रकृति की व्यवस्था कह दें या भाग्य की उठापटक पर ऐसा होता है हर किसी के जीवन में ऐसा होता है परिवर्तन अच्छे और बुरे दोनो होते हैं लेकिन अगर हमारे अपने हमारे साथ हैं तो हम हर परिवतर्न को आसानी से जी लेते हैं और देखा जाए तो जो अपने हैं वो सुख और दुख दोनों में अपने ही रहते हैं लेकिन जब हम सुख में होते हैं तो अपनों की कही गई हर बात अच्छी लगती है और हम ज्यादा ध्यान नहीं देते ज्यादा सोचते नही है लेकिन जब हम दुख में होते हैं तो अपनो की छोटी सी बात चाहे वो सही क्यों न हो हमें बहुत चुभती है ।
जैसे–अगर किसी का काम काज अच्छा नहीं चल रहा है तो ऐसे में उसका कोई अपना कीमती उपहार लाकर दे तो उसके मन में ये मुझे उपहार इसलिए दे रहा है कि मैं नही खरीद सकता मतलव ये मुझे नीचा दिखाना चाहते हैं लेकिन ऐसा करने का उसका कोई इरादा नहीं होता है लेकिन अगर वही उपहार वह उसके अच्छे समय में देगा तो उसे खुशी होगी और धन्यवाद देता है।
अत: जो सच्चे साथी हैं वो तो दुख और दुख दोनों में ही साथ रहेंगे बस सामने बाले का नजरिया बदल जाता है और जो दिखावे के साथी हैं तो फिर वही ये कथन सत्य करते हैं कि- -सुख के तो सब साथी,दुख में न कोय,

मीना विवेक जैन

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