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सुख के सब साथी

Priti Surana 1 year ago
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जी हाँ ये कथन आज के परिप्रेक्ष्य मैं नितांत सटीक बैठता है।आज का युग सुवार्थ और पैसे का युग है।आज के युग में रिश्ते भी पैसे से ही निभाए जाते हैंयदि कोई रिश्तेदार परेशानी मैं है गरीब है तो उसके इधर कोई भी जाना पसंद नहीं करेगा उसके इधर जाने का मतलब परेशानी ओढ़ना है अतः कौन इस परेशानी को ढोना चाहेगा।इसके विपरीत जो अमीर हैं सुखी हैं उनके इधर तो बिना बुलाये ही जाने मैं संकोच नहीं करेंगे दूर की रिश्तेदारी को भी ऐसे बताया जायेगा मानो खून का ही रिश्ता होगा।आज के युग में गैरों की तो छोड़िए अपने बच्चे भी दुःख मैं साथ छोड़ जाते हैं ।मेरे एक परिचित थे उनके बेटा एस, पी, बन गया पिता जी ग्रामीण लिबास में उससे मिलने पहुँच गए उसने किसी को बताया भी नहीं की ये मेरे पिता हैं,वो वापस लौट कर बहुत दुखी हुए।ये ही जमाना है भाई आज तो बुरे समय मैं सात जन्मों का साथ निभाने बाली पत्नी भी पति का साथ छोड़ जाती हैफिर भला और किसी की क्या कहें।अभी दूर न जाएँ विहार की उठा पटक भी इसी का परिणाम है।
आज हमें पुनः बच्चों को नैतिकता का पाठ पढाने की आवश्यकता है ,अच्छे संस्कार देने की आवश्यकता है जिससे उनमें ये दुर्गुण न पनप सकें और सभी सुख और दुःख मैं सभी का सहयोग कर सकें।

ज्योति उपाध्याय

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