LOADING

Type to search

Uncategorized अंतरा शब्दशक्ति संस्मरण

दुर्लभ

Priti Surana 1 year ago
Share

धरोहर

हमारी सासू मां ने जब हम बहू बनकर आई थी, तब बहुत ही प्यार से रखा –बेटी की तरह, और प्यार से मिलजुलकर रहना सिखाया था, हम सब एक ही संयुक्त परिवार में रहते थे—जहां प्यार नोक झोंक, लड़ाई झगड़े, हंसी मजाक, और ढेर सारा काम, पर सब अपने पन से मिलकर करते तो, काम जल्दी निपट जाता और फिर सब बैठकर साथ साथ खाना खते हंसी मजाक करते, वही परम्परा मैंने भी अपनाई और हम सब मिलकर काम करते हैं और फिर बैठकर आपस में किसी भी बात पर विचार विमर्श करना है, घर की चर्चा, समस्याओं का निराकरण—और इन सब में बहू की भी सलाह व स्वीकृति ली जाती, और अगर वह सही सलाह दे तो उसे मान्य भी किया जाता था,इस तरह हमारे यहां हर कार्य बहुत ही सुचारु रूप से सम्पन्न हो जाता है, और सबखुश रहते हैं, आत्मिक संतोष होता है ,कि हमारी बहू संस्कारी समझदार और घर को लेकर चलने वाली है, ये। ##धरोहर## मुझे अपनी सासू मां से प्राप्त हुई और यही धरोहर मैंने अपनी बहू को भी दी, और वह बहुत ही समझदार है अतः हमारा परिवार आज सुखी और सम्पन्न परिवार की श्रेणी में गिना जाता है, अन्यथा आज के जमाने में यह सब देखना दुर्लभ होता जा रहा है।

किरण मोर
*********

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *