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Uncategorized सप्ताह का कवि विशेषांक

Priti Surana 10 months ago
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इस बार *सप्ताह का कवि विशेषांक* में प्रस्तुत है दिल्ली की रचनाकार *मीनाक्षी सुकुमारन* का परिचय आत्मकथ्य एवं रचनाएँ। आप सभी की प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

प्रस्तुतकर्ता
*अंतरा-शब्दशक्ति*

*परिचय*
नाम : श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन
जन्मतिथि : 18 सितंबर, नई दिल्ली
शिक्षा : (एम ए (हिन्दी) एम ए (इंग्लिश
लेखन विधा : मुक्त
प्रकाशन : निजी काव्य संकलन
“भाव सरिता ” व् “ अहसास ए अल्फाज़ ” प्रकाशित |
साँझा संग्रह :
 एक साथ तीन अंतर्राष्ट्रीय काव्य संकलन “अपने अपने सपने ’’, “अपनी अपनी धरती”, “अपना अपना आसमान” में कवितायेँ प्रकाशित |
 “निर्झरिका” सयुंक्त साहित्य विशेषांक में कवितायेँ प्रकाशित |
 “साँझा संग्रह ” भाषा सहोदरी द्वारा में कवितायेँ प्रकाशित |
 “अहसास एक पल ” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 सहोदरी सोपान – 2 काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “वीथिका ” सयुंक्त वार्षिक साहित्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “भावों की हाला” काव्य संग्रह में कवितायेँ प्रकाशित |
 “कस्तूरी कंचन ” काव्य संग्रह में कवितायेँ प्रकाशित |
 “शब्द कलश” व् “दीपशिखा” अखिल भारतीय काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “भारत की प्रतिभाशाली हिन्दी कवियित्रियां” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “शब्द अनुराग “ व् “ शब्द गंगा ‘’ काव्य संकलनो में कवितायेँ प्रकाशित |
 कचंगल में सीपियाँ ’’ काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “महकते लफ्ज़ ” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित|
 “सत्यम प्रभात ” प्रेरक साझा संग्रह में कवितायेँ प्रकाशित|
 “ अंतर्मन की खोज ” शिक्षाप्रद एवं प्रेरक साझा कहानी संग्रह में कहानी प्रकाशित |
 “पुष्पगंधा” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “100 क़दम “काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “शब्द गाथा ” समीक्षा संग्रह में समीक्षा प्रकाशित |
 “काव्य अमृत “ व् “ प्रेम सागर काव्य सागर ” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित|
 “शब्दों का प्याला ” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “सहोदरी सोपान” 3 व् “सहोदरी कथा ”संकलन में रचनायें प्रकाशित
 “कश्ती में चाँद ” व् “ खनक आखर की ” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित|
 “ कुछ यूं बोले अहसास ” ” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “उत्कर्ष काव्य संग्रह ( 2 ) काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “काव्यगंगा” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “ भारत के प्रतिभाशाली हिन्दी रचनाकार” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “वृंदा” काव्य संकलन में कवितायेँ व् 18 कहानियाँ 18 कहानीकार में कहानी प्रकाशित
 “कविता अभिराम 3” (अयन प्रकाशन) काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “दिव्यतूलिका” देश भर के रचनाकारों का विशेष साहित्य अंक में कविता प्रकाशित |
 “ संदल सुगंध ” काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “गुमसुम ज़िन्दगी” हस्तलिखित काव्य संकलन में कवितायेँ प्रकाशित |
 “सुनो , तुम मुझ से झूठ तो नहीं बोल रहे !” विश्व हिंदी संस्थान ,कनाडा द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह में कहानी सम्मलित |
 “ तितिक्षा ” कहानी संग्रह में कहानी व् “मधुबन” साँझा प्रेम काव्य संग्रह में कवितायेँ प्रकाशित |
 “शब्द – शब्द समिधा” , “शब्द सृजन” काव्य संग्रहों में कवितायेँ प्रकाशित |
 “साहित्य कला संस्कृति जगत के स्वर्ण स्तम्भ” में परिचय व् कविता प्रकाशित |
 देश भर के विभिन्न समाचार पत्रों में लेख , कहानी व् कवितायेँ निरंतर प्रकाशित |
 6 से 7 काव्य संकलन व् एकल काव्य संग्रह “तरंग” शीघ्र ही अवलोकित |
सम्मान /पुरस्कार :
 1.“साहित्यगरिमा ” सम्मान 2014
 2. साहित्य गौरव पुरस्कार 2014
 3.नारी गौरव सम्मान 2015
 4.काव्य गौरव सम्मान 2015
 5.माँ शारदे उत्कर्ष सम्मान 2015
 6.दीप शिखा सम्मान 2016
 7.शब्द कलश सम्मान 2016
 8.साहित्यकार सम्मान 2016
 9 .युग सुरभि सम्मान 2016
 10.नारी सागर सम्मान 2016
 11. श्रेष्ठ शब्द शिल्पी सम्मान 2016
 12. राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान 2016….गंतव्य संस्थान द्वारा
 13. साहित्य गौरव सम्मान 2016…..युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा
 14. अमृत सम्मान 2016
 15.प्रतिभाशाली रचनाकार सम्मान 2016
 16. हिन्दी साहित्य गौरव 2016….उत्कर्ष प्रकाशन द्वारा
 17. हिन्दुस्तानी भाषा साहित्य समीक्षा सम्मान
 18.विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ द्वारा विद्यावचस्पति उपाधि प्रदान
 19.ट्रू मीडिया गौरव सम्मान – 2017
 20.प्राइड ऑफ़ वीमेन अवार्ड -2017
 21. हिन्दी सागर सम्मान 2017
 22. श्रेष्ठ साहित्य सृजक सम्मान
 23. साहित्य सारथी सम्मान 2017
 24. श्रेष्ठ कवयित्री सम्मान 2017
 25.सरस्वती सम्मान
 26.“ दिव्यतूलिका साहित्यायन ” सम्मान
 27.श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान ..विश्व हिन्दी रचनाकार मंच द्वारा
 28. “ विश्व हिंदी कथाशिल्पी सम्मान ” विश्व हिंदी संस्थान , कनाडा द्वारा
 29.“ काव्य गौरव सम्मान ” साहित्य सागर ..राष्ट्रीय साहित्यिक हिन्दी मंच द्वारा
 30. काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान 2017
 31. “शब्द शब्द समिधा सम्मान” , “शब्द सृजन सम्मान” , “साहित्य जगत के स्वर्ण स्तम्भ सम्मान”, कलमकलाधर / कलमवीर सम्मान …..ग्वालियर साहित्य ,कला परिषद ग्वालियर (म.प्र.) द्वारा |

*रूचि*

कविता लिखना , पुराने गीत व् ग़ज़ल सुनना बेहद प्रिय है|बचपन से ही डायरी लिखते लिखते लिखना आरम्भ हुआ | फिर स्कूल से कॉलेज मैगज़ीन आदि में सिलसिला ज़ारी रहा | उसके उपरांत “युववाणी “ आकाशवाणी दिल्ली से निरंतर कार्यक्रम प्रसारित होते रहे जिसमें साक्षात्कार ( फिल्म, खेल ,संगीत ,राजनीतिक , सामाजिक हस्तियाँ ), कविता , लाइव शोज़ इत्यादि | साथ ही सन्डे मेल व् राष्ट्रीय सहारा में लेखन ज़ारी रहा | कुछ वर्षो का पूर्ण विराम आया विवाह उपरांत आया 7 से 8 साल का जिसे पुन : फेसबुक के माध्यम से लेखन आरम्भ हुआ और एक नई पहचान मिली पुस्तकों ,समाचार पत्रों के माध्यम से |और अब ये क्रम निरंतर ज़ारी है |

*रचनाएँ*

*(1) कलम*

प्यार की दास्तां लिखूं
तो महकती है कलम।।
दर्द की कराहट लिखूं
तो सिसकती है कलम।।
सौन्दर्य की दिलकशी लिखूं
तो कसमसाती है कलम ।।
वीर , वीरांगनाओं , शहीदों
की वीरता, शहादत लिखूं
तो इतराती है कलम ।।
वहशीपन, दरिंदगी ,आंतकवाद
की शर्मिंदगी लिखूं
तो सुलगती है कलम ।।
न करो टुकड़े दिलों को
मज़हबी तलवारों से
न जलाओ देश को
नफरत की चिंगारियों से
करती अर्ज ये कलम।।
हो सुकुन , अमन, हँसी
ही बस हर घर आंगन
आँख न हो कोई नम
करती दुआ ये कलम ।।
करती दुआ ये कलम।।.

*(2) असमंजस*

असमंजस में हूँ
कौन सी किताब
कौन से पन्ने
कौन से शब्द
से उपजा ये बीज
द्वेष का
दुश्मनी का
कटुता का
दानवता का
उत्पात का
जिस ने मचा रखा है
आतंक हर देश , हर नगर
हर गांव , हर घर में ।।
असमंजस में हूँ
कौन सी किताब
कौन से पन्ने
कौन से शब्द
से उपजा ये बीज
मार दिये ज़ज़्बात सारे
और बना दिया हैवान
इंसा का दम भरने
वाले मानव को ।।
बहुत ही निराश
बहुत ही असमंजस
में हूँ
आखिर
कौन सी किताब
कौन से पन्ने
कौन से शब्द
ने रच दिया ये
हैवानियत का खेल सारा
हैवानियत का खेल सारा।।

*(3). आरक्षण*

बहुत हो चुका
हो हल्ला
आरक्षण
तेरे नाम का
कभी नोट का
कभी वोट का
कभी जाति का
कभी धर्म का
कभी राशन का
कभी भाषण का
कभी शोषण का
कभी सता का
कभी राज्य का
कभी शिक्षा का
कभी भर्ती का
कभी खेल का
कभी रेल का
हर जगह
आरक्षण
का ही तो
बोल बाला है
फिर क्यों
ये हो हल्ला है
करना ही है
आरक्षण
तो करो
दिल से दिल का
स्नेह से स्नेह का
सभ्यता से सभ्यता का
संस्कार से संस्कार का
देश से देश का
भाषा से भाषा का
बांधो डोर नेह की ऐसी
कोई स्वार्थ
कोई नफ़रत
कोई ताकत
खोल न पाये फिर इसे
करो आरक्षण
यूँ दिल से दिल का बस।।

*(4) एहसास*

कितनी बातें
वैसे वो कर लेती
कुछ अपनी
कुछ मेरी
कुछ परायी
कुछ ख़ुशी की
कुछ गम की
कुछ सपनों की
कुछ अपनों की
कभी हंसती
कभी रोती है
यूँ हर बात वो
मुझ से कर लेती है
कभी कह कर
कभी ख़ामोशी से
कभी रूठ कर
कभी मना कर
है कितनी अपनी
है कितने करीब
क्यों फिर भी
ये दूरी खलती
क्यों हर पल उसे पाने की
मन आस करे
क्यों हर धड़कन उसे चाहने का
एहसास करे
है कैसी अनोखी प्रीत ये
है मेरी फिर भी वो मेरी नहीं
है अपनी सी फिर भी अपनी तो नहीं।।

*(5)लकड़ियां*

कोई ढूंढ रहा
मसलों की लकड़ियाँ
सेकने की राजनितिक रोटियां
कोई ढूंढ रहा
ज़िन्दगी की लकड़ियाँ
जीने को फुटपाथ , झोपडी की बेबसी
कोई ढूंढ रहा
साथ की लकड़ियाँ
बनाने को बुढ़ापे का सहारा
कोई ढूंढ रहा
प्रेम की लकड़ियाँ
लाने को गर्माहट सर्द रिश्तों में
पड़ी यूँ सर्द मौसम की
यूँ मार ऐसी
किसी को निज स्वार्थ
की लकड़ियाँ
किसी को अपनेपन
की लकड़ियाँ
किसी को जीवित रहने
की लकड़ियाँ
किसी को चूल्हा जलाने
की लकड़ियाँ
हर किसी को है चाहत
सर्द मौसम की मार में
अपनेपन से भरे जीवन
को जीने की
चाहत और एहसास की
लकड़ियाँ……,।।

*(6). फौजी की पत्नी*

फौजी की पत्नी हूँ
नहीं इख्तियार मुझे
मिलन के गीत गुनगुनाने का
प्रीत के झूले झूलने का
चूड़ी की खनक से सजन की
रिझाने का
रुठने का मनाने का
पायल की रुनझुन से
घर आँगन चहकाने का
सिन्दूर की लाली पर
इतराने का
क्योंकि सीमा पर
कौनसी गोली पर
बिखर जाये मेरे जीवन की लड़ी
कब मैं फौजी की पत्नी से
शहीद की पत्नी कहलाऊँ
है यही तो बस किस्मत
हम फौजी की पत्नी की
हर पल बस थमी सहमी
रुकी रुकी सी रहे सासें
ऐसे में क्या भाये कोई
साज सिंगार
कोई दिन या कोई त्यौहार।।
फौजी की पत्नी हूँ मैं
कहते सभी कर गर्व
इस बात पर
कौन देखे मेरे मन की पीड़ा
जिस का नसीब सिर्फ और
सिर्फ इंतज़ार इंतज़ार
सूने सूने दिन और रातों का।।

*(7).कफन*

मिट्टी के तन पर
क्यों ओढे है
कफ़न गुरूर का
मौत से पहले ही
बेमौत मरता और मारता
क्यों है
मिट्टी का ढेला भर ही
है ये तन न कर मान
अभिमान तू इस पर
पल में हो जायेगा
जब राख ये तन
सिर्फ दुनिया याद
रखेगी तेरा मन
हो सके तो बन्दे
जांच परख चमका ले
बस उसे तू
है मिट्टी का ये तन
मत कर इस पे मान
तू कभी भी ।।

*मीनाक्षी सुकुमारन*

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