LOADING

Type to search

Uncategorized सप्ताह का कवि विशेषांक

मीना जैन वारासिवनी

Priti Surana 10 months ago
Share

 

*परिचय*- नाम-मीना विवेक जैन
पिता-श्रीमान गुलाब चंद्र जैन
माता-श्रीमती विमला जैन
पति-श्री विवेक जैन
पता-श्रीमान विरेन्द्र जैन
जैन दूध डेयरी वारासिवनी जिला बालाघाट(म.प्र.)

*आत्मकथ्य-*
मेरा स्वभाव बचपन से ही थोड़ा संकोची एवं भावुक रहा है लिखने शौक तो था लेकिन संकोची स्वभाव के कारण महत्वकाँक्षायें अधूरी ही रह गई ं,शादी के पहले बस डायरियों मे ं ही लिखते रहती थी लेकिन शादी के बाद मेरे इस शौंक को परिवार बालों का साथ मिल गया और महत्वकाँक्षायें फिर जागने लगीं।
ससुराल में पहली बार शरद पूर्णिमा के दिन हमारी जैन समाज में एक कवि सम्मेलन रखा गया जिसमें मुझे मेरे आदरणीय भैया(जेठजी)ने अपना काव्य पाठ करने के लिए प्रेरित किया , मंच पर कभी बोला नहीं फिर डर और झिझक के बाद भी मैंने अपना काव्य पाठ किया , और वहीं से शुरूँ हुआ मेरा ये साहित्यिक का सफर ,वहां पर उपस्थित जैन समाज के एक बिख्यात कवि श्री सुरेश सिंघईजी ने मुझे एक साहित्यिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया और मेरी मुलाकात हुई श्रीमती राजश्री तिवारी जी से और उन्हीं ने मेरा परिचय कराया आदरणीय प्रीति भाभी से ,और उन्होंने मुझे जोडा अंतरा शब्द शक्ति से जिससे जुडकर मुझे लिखने की एक नई दिशा मिली रोज बिषय पर लिखने का उत्साह बना रहता था ,उन्होंने मेरी कुछ रचनाओं को लोकजंग में स्थान दिया और मुझे मेरे जीवन का पहला साहित्य सम्मान जो अभी इंदौर में मिला बस वही मेरी पहली उपलब्धि है, लेकिन इससे भी बडी उपलब्धि ये है कि मुझे अतंरा परिवार मिला जिसमें इतने बड़े साहित्यिकारों से मेरा परिचय हुआ, बस यूं ही साथ बना रहे हमेशा यही चाहती हूँ,..

*(1)* इक शहीद की पत्नी की ह्रदय वेदना

इक बार तो आ जाओ प्रियवर तुम
तरस रहे हैं ये नैना
देख न पाई कब से तुमको
तडप रहा दिल पड़े न चैना

ये कैसा दिन आया प्रियेवर
साथ हमारा छूट गया
प्रेम से भरे खजाने को कब
कोई लुटेरा लूट गया

बिन तेरे अब क्या जीना रे
हाय बिधाता!अब क्या होगा?
बिन पापा के इन बच्चों का
बचपन जाने क्या होगा?

देश की खातिर दूर रहे तुम
ये सब मैंने सहन किया
पर क्यों जान लुटा दी ऐसे
मुझे तड़पता छोड़ दिया।

झर झर आँसू बहते जांये
कोई तो उन्हें बुला दे रे
शायद होगा सपना ये सब
कोई तो मुझे जगा दे रे

देर करो न अब तो मेरी
बात जरा सी सुन लेना
इक बार तो आ जाओ प्रियेवर तुम
तरस रहे हैं ये नैना।
तरस रहे हैं ये नैना।

*(2)* तलाश करने निकली हूँ
मैं
अपने ही बजूद को
क्या है मेरा अस्तित्व
आखिर कुछ तो
हुनर होगा
मुझ में भी
अब तो ठान ली हूँ
अपने ही मन में
निराश नहीं होना है
अब इस जीवन में
गुजर गए इतने
बर्ष बस ऐसे ही
सारहीन हो गए हैं
अनमोल जीवन के
इतने सारे लम्हे
अब एक एक पल की
कीमत मुझे आँकना है
जो बीत गया सो बीत गया
अब उसमें नही झाँकना है
बस तलाश करना है
इस बचे हुए जीवन में
अपनी पहचान की
अपने अंदर छिपी हुई
उस प्रतिभा की
जिससे सार्थक होगें
जीवन के अनमोल
पल ,..

*(3)* कितना अच्छा लगता है
जब मिल बैठे परिवार।
हंसी खुशी चर्चा करें,
बड जाये प्रेम अपार।।
मन में जब लग जायेगी
अपने अपनो की प्रीत।
टूट जायेगी दुनिया की
फिर अलग होने की रीत।।
सदा साथ रहने का जब हम
दृण निश्चय लें मन में ठान।
सुखी रहेगा जीवन अपना
और बढ जायेगा मान।।

*(4)* “दूरियाँ”

समय के साथ यहाँ
सब कुछ बदल जाता है
बढे जो कदम तो कदम
तो रास्ता निकल आता है
“दूरियाँ”हो जाती हैं अपनो
से अक्सर
जब गैरों से नया रिश्ता
निकल आता है
खबर नहीं रहती है हमें
अपने ही लोगों की और
गैरों की खबर लेनें को
घर से निकल जाता है
समय के साथ यहाँ
सब कुछ बदल जाता है

*(5)* ऐ कलम,

ऐ कलम तू लिख दे ऐसा
जिसे पढें सारा जहाँ
भूल जायें दुश्मनी सब
जुल्म के न हों निंशान

न लडें आपस में कोई
देश की शक्ति बने
हर तरफ खुशियां ही खुशियां
सपने सच पूरे करें

हो निराली शान ऐसी
विश्व में सम्मान हो
हो निराला देश ऐसा
जिस पर हमें अभिमान हो

सिख् ,ईसाई रहे हो ं
या हिन्दू मुसलमान हो ं
चाहे कोई भी धर्म हो पर
राष्ट्र धर्म का भी ज्ञान हो
ऐ कलम तू लिख दे ऐसा…..

*(6)* माँ मुझे तुमसे कुछ कहना है
जो कुछ तुमसे सीखा है
वह तुमसे ही कहना है,
मैं तो तुमको छोड चली
अब दूजे घर में रहना है
बहू तुम्हारी साथ में है अब
माँ तुमको उनकी बनना है
मेरी याद न करना माँ अब
बहू को बेटी कहना है
अब वही तुम्हारे घर की लक्ष्मी
अब वही तुम्हारा गहना है
सदा लुटाना ममता उस पर
उसका जीवन खुशियों से भरना है
यह सोच के माँ मैं भी
खुश हो जाऊँगी
बेटी का तुमको प्यार मिले
मेरी माँ का ये घर परिवार
सुखमय और खुशहाल रहे,..

*(7)* जिंदगी है जब तक
खुशी और गम तो
मिलते ही रहेंगे
हौंसले का पकडकर
दामन हम तो बस
चलते ही रहेंगे
बहुत कुछ पाने की
चाहत थी दिल में
पा न सके सोचकर
खलते ही रहेंगे
जख्म इस दिल के
न भर जायें जब तक
मरहम हम उन पर
मलते ही रहेंगे

मीना विवेक जैन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *