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Uncategorized सप्ताह का कवि विशेषांक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

Priti Surana 8 months ago
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इस रविवार *सृजक-सृजन-समीक्षा विशेषांक* में प्रस्तुत है जन्मदिन की शुभकामनाओं सहित *डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’* (संस्थापक हिन्दी ग्राम) का परिचय आत्मकथ्य और रचनाएँ। आप सभी की प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

प्रस्तुतकर्ता
*अन्तरा-शब्दशक्ति

*परिचय*

*नाम:* डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

*पिता:* श्री सुरेश जैन

*माता:* श्रीमती शोभा जैन

*पत्नी:* श्रीमती शिखा जैन

*जन्म:* २९ अप्रैल १९८९

*शिक्षा:* बीई (संगणक विज्ञान अभियांत्रिकी)

एमबीए (इंटरनेशनल बिजनेस)

पीएचडी- भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ

*भाषा ज्ञान:* हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी, मराठी,गुजराती, फ्रेंच सहित १० से अधिक भाषाएँ

*पुस्तकें:*

१. मेरे आंचलिक पत्रकार ( आंचलिक पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक )

२. काव्यपथ ( काव्य संग्रह)

३. राष्ट्रभाषा (तर्क और विवेचना)

४. नव त्रिभाषा सूत्र (भारत की आवश्यकता)

*साझा संग्रह:*

१ मातृभाषा – एक युग मंच ( साझा काव्य) संग्रह

२. मातृभाषा. कॉम ( साझा काव्य संग्रह )

३. मरीचिका ( साझा काव्य संग्रह )
४. विचार मंथन ( साझा आलेख संग्रह )

५. कथा सेतु ( साझा लघुकथा संग्रह)

*संपादन:*

मातृभाषा.कॉम

*दायित्व:*

राष्ट्रीय अध्यक्ष- मातृभाषा उन्नयन संस्थान

राष्ट्रीय अध्यक्ष- पत्रकार संचार परिषद

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- राष्ट्रीय मानव अधिकार परिषद महासंघ

महासचिव- नाथीबाई परमार्थिक ट्रस्ट

अध्यक्ष- सेंस फाउंडडेशन

सदस्य- इंदौर प्रेस क्लब

सदस्य- फिल्म डायरेक्टर एसोसिएशन, मुंबई

सदस्य- मुंबई फिल्म प्रॉडयूसर एसोसिएशन, मुंबई

*पत्रकारिता:*

प्रधान संपादक- खबर हलचल न्यूज ( साप्ताहिक अख़बार)

प्रधान संपादक- के एन आई न्यूज ( न्यूज एजेंसी)

प्रधान संपादक- मधुकर संदेश

सह संपादक- मध्यप्रदेश टाइम्स समाचार ( ४० वर्ष पुराना अख़बार )

तकनीकि संपादक- मासिक अन्तरा शब्दशक्ति

सलाहकार संपादक- अपराधों की दुनिया

सलाहकार संपादक- न्यूज१०० लाइव

सलाहकार संपादक- जनता न्यूज, उत्तरप्रदेश

सलाहकार संपादक- ग्रामाँचल न्यूज, उत्तरप्रदेश

सलाहकार संपादक- आईबीएन ९ न्यूज

सलाहकार संपादक- IND9 न्यूज

*व्यवसाय:*

समूह सह संस्थापक- सेंस समूह

मुख्य कार्यकारी निदेशक- सेंस टेक्नॉलोजिस

सह संस्थापक- सेंस बिल्डकॉन

संस्थापक- मातृभाषा.कॉम

संस्थापक- हिन्दीग्राम

संस्थापक- इंडियन रिपोर्टर्स

संस्थापक- पाठशालम

संस्थापक- सेंस फिल्म्स

संस्थापक- उर्दूभाषा

संस्थापक- साहित्यकारकोश

सह संस्थापक- अन्तरा-शब्दशक्ति

कार्यकारी निदेशक- सेंस बिल्डकॉन

कार्यकारी निदेशक- डेबीज एशोरेंस प्राइवेट लिमिटेड

सहसंस्थापक- जस्ट इन्फो मी

संस्थापक- ईआर्टिस्ट बैंक

*संपर्क:* +९१- ७०६७४५५४५५ | +९१-९४०६६५३००५ | +९१-९८९३८७७४५५

*अणुडाक:* arpan455@gmail.com

*अंतरताना:*  www.arpanjain.com

*पता:* एस-२०७, नवीन परिसर, इंदौर प्रेस क्लब, म.गां. मार्ग , इंदौर (मध्यप्रदेश) ४५२००१

*आत्मकथ्य:*
साहित्य सदन की पीड़ा को मैंने अपने अन्दर जीने की जिद में लेखन को अपना शौक बनाया। बतौर पत्रकार जनमंच की वेदना को ख़बरों में उकेरने के प्रयास के चलते मैं हिन्दी से प्रेम करता चला गया, यही कारण लेखन के क्षेत्र में मेरे आने का भी रहा। काव्य से ज़्यादा राजनैतिक विषयों पर टिप्पणियाँ मेरे लेखन की पहचान भी है और प्रवीणता भी उसी में ज़्यादा है।

*मैं कैसे लेखन में..*

मैं शब्दों की दीपशिखा से
प्रीतिगान बना लाया,
मैं भावों के शांत शरों से
ब्रह्मबाण बना लाया,

मैं प्रेमी की नेह माला से
सारे पुष्प उठा लाया,
मै लाया हूँ गीत गजल
भाव वंदना बहला लाया,

मैं लिखता हूँ काव्य सरल
मैं उपमा रुपक हूँ लाया,
लिखता हूँ लघुकथा भी मैं
आलेख के प्राण बचा लाया,

मेरा मान बना लेखन से
मैं अक्षर गान सजा लाया,
मैं श्वसन की बींध प्यारी से
काव्य रागिनी उठा लाया,

मैं संस्मरणों की अँखियों से
स्नेह के काजल चुरा लाया,
यादों की तंग गठरियों से
शब्द दीपिका चुरा लाया,

मैं मटियारीन कोठरियों से
तत्व ज्ञान सहला आया,
मैं चारण बनकर हिन्दी का
ममता छाँह चुरा लाया,

मैं लिखता हूँ सत्य संहिता
मन का दामन रंग आया,
मैं यौवन के मधुमास से
बांसती रंग चुरा लाया,

मैं कुंवार की धुप सु़धा से
गर्म तपन चुरा लाया,
लेखन में होते उग्र ताप को
सूरज से भी सजा लाया,

मैं धरती के तुर्कमान से
भारत धर्म उठा लाया,
मैं लाया हूँ साहित्य साधना
मैं भाव रक्षणा चुरा लाया,…

देश के लगभग सभी प्रसिद्ध और बड़े अख़बारों में मेरा लेखन प्रकाशित होता रहता है , जनसत्ता, अमरउजाला, हरिभूमि, दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, दिव्य भास्कर, समाज्ञा, मुंबई मिरर, महाराष्ट्र संदेश, इंदौर समाचार, उत्तरांचलदीप, सवेरा टाइम्स, पंजाब केसरी, पांचजन्य, सामना, स्वदेश, नवभारत टाइम्स, नवभारत, उत्तम हिंदू, सनातन प्रभात, यशोभूमि, उत्तर उजाला, जगमार्ग, राँची एक्सप्रेस, लोकजंग, जनपथ, नेशनल हेराल्ड, ग्लोबल हेराल्ड, दबंग दुनिया, पीपुल्स समाचार, अपनी दुनिया, अपराधों की दुनिया, जनहित टाईम्स आदि में संपादकीय आलेखों को स्थान मिलता रहता हैं ।

*किन व्यक्तित्व से मैं सदा प्रभावित रहा:*

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, बाबा नागार्जुन, धूमिल, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, बाबू विष्णु पराड़कर, गणेशचंद्र विद्धयार्थी, प. दीनदयाल उपाध्याय ( एकात्मवाद के कारण), डॉ. अबुल पॅकिर जेनुल आबदीन अब्दुल कलाम, राजेंद्र माथुर( रज्जु बाबू) धीरू भाई अंबानी( रिलायंस), वारेन बफ़ेट(बर्कले हैथशायर), स्टीव जॉब्स (एपल) डॉ. प्रीति सुराना (अन्तरा- शब्दशक्ति)|

*पाठकों के लिए:* बेहतर रचना लिखने के लिए बेहतर पढ़ना श्रेष्ठ होता है,एक अच्छा पाठक ही लेखन के उद्देश्य को अपनी सम्पूर्णता तक पहुंचाता है । काव्य सृजन भी मानस के अन्तस तक उतरने वाला वह प्रयास हैं जिसमे भावों के रास्ते ह्रदय के तम को उजास प्रदान करना होता हैं। प्रतिक्रिया रूपी शब्द तरकश सृजक की प्रेरणा होती हैं ।

*सम्मान:*
1. पत्रकार विभूषण अलंकरण (आईजा, मुंबई)
2. गणेश शंकर विद्यार्थी श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान ( गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब, इंदौर इकाई)
3. नगर रत्न अलंकरण ( इंदौर )
4. काव्य प्रतिभा सम्मान (इंदौर)
5. Leaders of Tommorw Award ( Indiamart,Mumbai)
6. नेशन प्राईड, इंडिया एक्सीलेंस अवार्ड ( प्रतिमा रक्षा मंच, दिल्ली)
7. हिन्दी साहित्य रत्न सम्मान (साहित्य संगम संस्थान, तिरोड़ी)
….. आदि

*कुछ रचनाएँ आपके समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत हैं, कृतार्थ करें*

*1. *अभिलाषा…*
हे प्रिये,

केशों में तुम्हारे हो वेणीबंध
गालों पर हो गुलाबी अनुबंध
अधरो पर लिपटे प्रेम प्रतीक
भावों में नेह की हो सुगंध

भरी हो प्यारी मांग तुम्हारी
मेरे हाथों हो सिन्दुरी सिंचन
बिन्दी,बिछियाँ सजी रहें
सुहाग का जोड़ा करे मंथन

पैरों में पायल की छनछन
मेरे प्रिय का हो अभिनंदन
प्रश्नों की फूलवारी का मर्दन
दीप्त रहे क्षितिज-सा यौवन

नयनों में डूबा हो प्रेम प्रवर्तन
काट कलुष उर के सब बंधन
ओ प्रिये मेरी प्राण सुधा तुम
तुमसे ही मेरा जीवन चंदन

*2.  पाती प्रेम की…*

वो छुट-पुट रंग तुम्हारे प्रेम के
वो कागज की कतरनें पत्रों की
वो सिहरन यादों के सायों की
वो पपीहे का मधुर नाद

वो अधजली बाती दीप की
सिमटा हुआ गुलाब किताबों में
कुछ अनकहे शब्दों का ताना बना
अवि की वो अनसुलझी पहेलियाँ

बिलखती रातो में तारो की सेज
सिसकती करवटों में तुम्हारी यादें
उम्र के कच्चेपन में सवाल तुम्हारे
जवाब में फिर मेरा चुप-सा हो जाना

अदभुत है प्रेम राग से तान छेड़ना
सिमट-सा जाना तुम्हारी यादों में
बादलों की ओट में बूंदों का सामना
बस प्रेम तो है अब गुजरा जमाना

बस प्रेम तो है अब गुजरा जमाना,..

*3.  हिन्दी है मेरे राष्ट्र की भाषा*
(तर्ज- चन्दन है मेरे देश की धरती)

हिन्दी है मेरे राष्ट्र की भाषा
हिन्दी निज अभिमान है,
हर स्वर व्यंजन ताकत इसकी,
अक्षर अक्षर जान है…

हर शब्द जीवन का तारक
हर अक्षर उपकारी है,
जहाँ पंत और बने निराला
जहाँ महादेवी भी प्यारी है,
जहाँ गीतों में राम रहीम है
हिन्दी मेरी जान है,
हर स्वर व्यंजन ताकत इसकी
अक्षर अक्षर जान है…

जहाँ भुजाएँ गद्ध से बनती
छन्द जहाँ कल्याणी है,
जन जन गाए गीत इसीके
जन गण मन की वाणी है,
प्रेम जहाँ रंग देता स्वर को
भारत भूमि की शान है,
हर स्वर व्यंजन ताकत इसकी,
अक्षर अक्षर जान है…

जिसमें रच-बसकर,पढ़कर
बनता राष्ट्र महान है ,
जहाँ गीत में गुंजन इसका,
संस्कृत इसके प्राण है,
जीवन की है प्राणसुधा यह
भारत का यशगान है,
हर स्वर व्यंजन ताकत इसकी
अक्षर अक्षर जान है…

हिन्दी है मेरे राष्ट्र की भाषा
हिन्दी निज अभिमान है,
हर स्वर व्यंजन ताकत इसकी,
अक्षर अक्षर जान है…

*4. मनहरण धनाक्षरी- धरती के पूत*

धूल धूल हो रही है
धूप धूप छा रही है
धरती के पूतों को ही
राजनीति खा रही।

हलधर चुपचाप
सहता है सूर्य ताप
नियति कुपित हो के
आदमी को खा रही।

प्राण दान कर रहे
धरती के सुत आज
स्वार्थ भरी नीतियां ही
खुशियों को खा रही।

छोड़ दो ये बोलना कि
है कृषि प्रधान देश
खेतीहर हार रहा
मौत उसे खा रही…

*5. बिटियाँ*

शांत हुआ है सागर,
ठहर गया मदमास,
बिटिया पीड़िता बन गई
किस पर हो विश्वास।

मौन हो गई है धरा,
सहम गया विन्यास
सभ्यता मुहँ चिढ़ा रही
आदम ही है त्रास।

विकास कैसा गौण है
प्रगति है बकवास
बच्ची बचाई न गयी
झूठा करें उपवास।

माया के साथी बने सब
स्वयंप्रभा का आवास
कोकिला भी क्षुब्ध हुई
घर बन रहा कारावास…

*6.  चल उठ नीरव.. (बाल कविता)*

चल उठ नीरव
तू दौड़ लगा,
अपने तन में
प्राण तो भर…

तू बन फुर्तिला,
चढ़ कदंब पर
श्वासों में नव
तान तो भर,..

भोर भई अब
हुआ अरुणोदय
तू सरपट चल
नवस्फूर्ति नवप्राण तो भर,..

योग कर और
मैदान में जा तू
जीवन के रंग की
पहचान तो कर,..

खेलों से मिलता है
फुर्तीलापन
तन को अपने
मजबूत तो कर,…

तू तेज चल,
तू दौड़ लगा,
तू मंजिल तक जा,
मेहनत तो कर,..

इस उजास में
फिर पुस्तक पढ़
प्रात:काल में
शिक्षण तो कर,..

कर मेधा तीक्ष्ण
ऊर्जा को केन्द्रित
भर नवस्फूर्ति
नवगान के स्वर..

उद्यान से आकर
विद्यालय जा
घर की शान तो बन
पढ़-लिख कर ,..

न समझ कोई जाति
न यहाँ का धर्म कोई
पहले इंसान तो बन
सब तज कर ,..

चल उठ नीरव
अब दौड़ लगा तू
अपने तन में
प्राण तो भर….

*7.  माँ मैं,..* (बाल कविता)

माँ मैं सूरज को लेकर आऊंगा,..

तेज सुर्ख नभ के मुखिया को
अपने खेल की गेंद बनाउंगा
रोज खेलकर पुन: छोड़ आ जाऊंगा।
माँ मैं सूरज को लेकर आऊंगा,..

कई घरोंदे कई स्वप्न रोज बनाउंगा
इस बुनकर को मैं भी तो सताउंगा
संग सैर करुंगा पुन: छोड़ आ जाऊंगा।
माँ मैं सूरज को लेकर आऊंगा,..

तेज सवारी, तीक्ष्ण ताप है,
मैं शीतलता से सह जाउंगा,
गुणधर्म सीखकर पुन: छोड़ आ जाऊंगा,..
माँ मैं सूरज को लेकर आऊंगा,..

तार सप्त-सा दीप्त व्याप्त है
रोशन इससे दुनिया कर जाउंगा
तिमीरहर को पुन: छोड़ आ जाऊंगा
माँ मैं सूरज को लेकर आऊंगा,….*

*डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’*

2 Comments

  1. विलक्षण व्यक्तित्व के धनी परम आदरणीय अविचल जैन जी की लेखनी को सादर नमन

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  2. विलक्षण व्यक्तित्व के धनी व कलम के गौरवमय सिपाही डा0 अर्पण जैन… अविचल… जी की प्रतिभा को सादर नमन

    Reply

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