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Uncategorized सप्ताह का कवि विशेषांक

रमा प्रेम शांति, बालाघाट (मप्र)

Priti Surana 6 months ago
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इस सप्ताह सृजक-सृजन-समीक्षा विशेषण में प्रस्तुत है रमा प्रेम शांति बालाघाट का जीवन परिचय, आत्मकथ्य एवं रचनाएँ। आप सभी की प्रतिक्रियाओं की अपेक्षा रहेगी।

 

प्रस्तुतकर्ता

*अन्तरा-शब्दशक्ति*

*-परिचय -*

 

नाम – सुश्री रमा देवी तेकाम

साहित्यिक नाम – रमा प्रेम – शांति

माता – श्रीमती शांति देवी तेकाम

पिता – स्व. प्रेमसिहं तेकाम

जन्मतिथि – 05 जुलाई

जन्मस्थान – जबलपुर  ( मप्र )

शिक्षा – एम.ए ( हिन्दी साहित्य, समाजशास्त्र ) बी. टी. आई

व्यवसाय –  ( शिक्षिका )

शास.हायर सेकंडरी स्कूल लिंगा बालाघाट ( म.प्र )

 

कार्यक्षेत्र –

 

1. *-खेल-*

*********

*-राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी -*       ( स्वंय – विद्यार्थी जीवन मे ) खो- खो , एथलेटिक्स एंव  व्हालीबाॅल में  ( राज्य स्तरीय )  जबलपुर से  ।

 

*-बालाघाट जिले मे साफ्टबाॅल खेल -* की  शुरूआत मेरे  द्वारा ।

 

*-2 छात्र शालेय  राष्ट्रीय स्तर पर चयनित एंव जिले  के   *-40 छात्र – छात्रों का  राज्य स्तर तक चयन  -*

 

*-3.   2 छात्र मेरे मार्गदर्शन से  कैरम प्रतिरोगिता में राष्ट्रीय स्तर तक ।-*

 

2. *-सांस्कृतिक -*

*****************

 

*-गणतंत्र दिवस -* छात्रावास के  121 छात्र – छात्राओं को लोकनृत्य मे गीत चयन कर नृत्य छात्रावास अधिक्षिका के साथ मिल सिखाया और *-प्रथम स्थान * प्राप्त किया।

 

3. *-सामाजिक-*

*************

निशुल्क स्वास्थ्य शिविर ग्रामीण स्थान पर हमारी टीम द्वारा  ।

एंव अपनी भाषा को बचाएं रखने के प्रयास ।

वृद्ध आश्रम में सहयोग , दीन – दुखी  को  सहयोग ,

 

मोबाइल नंबर – 8458932800

 

*-प्रकाशन -* आकाशवाणी बालाघाट कार्यक्रम – इनसे मिलिए  , महिला जगत  ,विश्व महिला दिवस पर मुख्य, होली ,  बाकी अन्य।

सहमत संस्था बालाघाट की पत्रिका मे कविता ।

सामाजिक पत्र – पत्रिका मे ।

लोकजंग मे ” अंतरा ” के माध्यम से ।

नव्यानारी भोपाल

वूमन आवाज इंदौर

 

*-सम्मान -*

 

1. *-सन्-1986मे मध्यप्रदेश शासन द्वारा बधाई पत्र एंव 4000 रू  ( चार हजार रुपये )  खो – खो खेल में राष्ट्रीय स्तर पर रजक पदक करने पर  कक्षा आठवीं में ।-*

 

2 .  *-2015  बाबू जगजीवन राम कला, संस्कृति & साहित्य अकादमी नई दिल्ली – *-वीरांगना सावित्री बाई राष्ट्रीय सम्मान पदक-*

 

3.  *-6 दिसम्बर 2017 प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति करनाल  ( हरियाणा )  *-राष्ट्रीय  रत्न अवार्ड 2017 -*

 

4.  2015  भारतीय दलित साहित्य अकादमी – धमतरी छत्तीसगढ – *-खेल रत्न अवार्ड -*

 

5.  ग्राम पंचायत कोसमी  बालाघाट  – *-सर्वश्रेष्ठ शिक्षक-*

 

6. Jyotiba phule ideal Teacher Honour 2015 ( Balod – CG )

 

7.  2015  भा.द.सा. अ.गुरूर छत्तीसगढ *-सावित्री बाई फूले आर्दश शिक्षक सम्मान -*

 

8. गणतंत्र दिवस समारोह जिला – बालाघाट 2016 में *-उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान -*।

 

9. शब्द शक्ति सम्मान 2016 ( रा. कवि संगम )

 

10. गणतंत्र दिवस समारोह जिला -बालाघाट 2017 मे शिक्षा विभाग द्वारा *-प्रतिभा सम्मान -* ।

 

11. काव्योदय काव्य गोष्ठी वारासिवनी – बालाघाट – प्रशस्ति पत्र

 

12 .राष्ट्रीय कवि संगम वारासिवनी बालाघाट – सम्मान पत्र ।

 

13.  सहमत संस्था बालाघाट – साहित्य कुम्भ – सम्मान पत्र।

 

14. नगर पालिका बालाघाट एंव सहमत संस्था  – साहित्य  गौरव सम्मान  2017 ।

 

15 .नूतन कला निकेतन संस्था बालाघाट – खेल – साहित्य अभिनंदन 2017 ।

 

16. गोंडवाना बावली समिति हट्टा बालाघाट  – सम्मान पत्र  2018 ।

 

17. अंतरा शब्दशक्ति सम्मान 2018 ।

 

*-आत्मकथ्य -*

 

घर में चार बहनों में सबसे छोटी होने के कारण कुछ ज्यादा ही बोलने की आदत हो गई , जबकि मुझसे भाई छोटा हैं । बाबूजी ने उस जमाने में भी जबलपुर जैसे शहर में हर क्षेत्र में भाग लेने व बोलने की पूरी आजादी दे रखी थी , जँहा प्रायः लड़कियों को बहुत कम  स्वतंत्र रखा जाता था , वँहा यह कहते हुए आजादी दी  कि ,आपका भविष्य आपके हाथ में हैं स्वंय निर्णय लेने की क्षमता रखो बाकी हमारा आर्शीवाद सदैव हैं और माता जी मेरी जो वर्तमान में भी हर पल मेरे साथ रहती, उन्होंने ने भी कभी नहीं रोका था ना अभी रोकती बस  यही कहती मेरे रहते सब कर ले बेटा , तू भी  मेरा बेटा हैं ।

तीनों बहनों में मैं कमजोर , मुझे शिक्षा एंव खेल के क्षेत्र में पिताजी के साथ उन लोगो ने भरपूर सहयोग दिया जिससे मैं नेशनल तक खेल  , सम्मान व खेल छात्रवृति पाई। तब पिताजी कहते  ये  प्रेम  पुत्री हैं और गर्व महसूस करते थे उनके आफिस में सम्मान साहब होने के साथ हम बहनों के कारण भी होता था।

तीनों बहनों की शादी जबलपुर से कर

वो रिटायर्ड के बाद ज्यादा दिन हमारे बीच नहीं रहे , जिसकी कमी मेरे जीवन पर आज भी हैं ।

माँ जी ही मेरी जिंदगी हैं , पूजा के बदले सुबह – शाम और घर से बाहर जाते समय उनका पैर छूकर निकलती हूँ और अपनी पेमेंट एंव  सम्मान सबसे पहले उन्ही के हाथों में देती हूँ , यही मेरी सबसे बड़ी खुशी होती है ।

सामाजिक एंव साहित्य क्षेत्र में कार्य करने अकेले निकली अब मेरी  बहने एंव जीजा जी लोग साथ हैं । बस इन्ही बड़ो के आर्शीवाद से कुछ भी करने तैयार रहती ।

 

*रचनाएँ*

 

*1. माँ – ममता*

 

माँ  तेरी  ममता  की  छाया ,

कहीं      नहीं    और       हैं ,

देख दुनिया  में  चारों  ओर ,

डर  का  खौफ ही खौफ हैं ,

 

चार दिवारी के अंदर भी अब ,

डर  ही  डर  लगता  रहता  है ,

नहीं  कोई  चीख सुनने वाला ,

दीवारों  पर भी परदा रहता है ,

 

निकलती हूँ जब घर से मन में ,

भय  ही  भय   भरा  होता  है ,

है  तेरी   ममता    की   छाया ,

बस  यही  सुख  तो  होता  है ,

 

देश अपना,लोग अपने फिर भी,

दहशत  ही  दहशत  भरी   है ,

अपने  ही  देश  में  मारे जा रहे ,

बेगुनाह *-रमा-* कैसी ये नीति है।

*2.अजन्मी बेटी*

 

प्यारी  बेटी , प्यारी  बेटी ,

तू   कितनी  अंजान   है ,

यही  सोच   मेरा   मन ,

हो  रहा  बड़ा परेशान है ,

 

तुझे  क्या  बताऊं , ये  संसार ,

बेटी , कितना  खतरनाक   है ,

जितनी  तू  कोख  में  सुरक्षित ,

उतना  कहीं  न  तेरा  मान  हैं ,

 

जब  भी  सोचूं , तू जब जन्में ,

क्या -क्या सुनना पड़ेगा मुझे ,

सबसे  पहले   तेरे   ” पापा ”

की  ही  सुनना  पड़ेगा  मुझे ,

 

फिर मैं जमाने की क्या बताऊं ,

तुझे , मेरा  मन  बैठा  जाता  है ,

तुझे  धरती  पे लाने  का खौफ ,

हर   पल  मुझे   तड़फाता   है ,

 

कैसे  जन्म दूँ  ?? तुझे  मैं  बेटी ,

माँ  का  दर्द  माँ ने  ही जाना है ,

*-नाज-* मेरी बेटी जब *-रमा-*

कहती उसका जीवन तर जाता है।

 

*3.प्रकृति – उपहार*

 

सबसे    उत्तम

” तोहफा ”

हमको    देता

प्रकृति     का

पूरा   परिवार

है         देता

 

जो  निरंतर  कार्य

करता   है   रहता

और हम सब को

निस्वार्थ भाव से

” जीवन – दान ”

है            देता ,

 

” धरती ” है  इसकी

मूल  –        धरोहर

माँ   के   नाम    से

इसे   पूजा    जाता

ये   ना   होती   तो

हम   भी  ना  होते

ऐसा   इनसे  हम

सबका  है  नाता

 

पिता  के  समान  ये

” आसमान ”

है  जो  करता हमारी

ओजोन परत से रक्षा

ये      ना   होंगे    तो

हम  भी  मर  जायेंगे

फिर ना जीवन पायेंगे

 

पर्वत  – पहाड   है

भाई     के     जैसे

जो करते है दुश्मनों

से     हमारी   रक्षा ,

 

नदियाँ    बहन     सी

होती  है  जो  देती  है

प्यार               सदा

उसमें  जी  लेते  फिर

नर  –  नारी      और

सभी    जीव     यंहा

 

नन्हे  मुन्ने  और  बड़े

पौधे    हमें   देते   है

शुद्ध     हवा    सदा

हरियाली से मिलती

है जीवन  जीने  की

कला           यंहा

हरियाली  होती  है

पानी से होती सदा

 

और  भी  बहुत   कुछ

देती   है    हमको  ये

खुशियों भरा “उपहार ”

” रमा ” प्रकृति    का

भरा    पूरा   परिवार ।।

 

*4.पहचान -*

 

मानव  दिन  पे  दिन

अपनी  *-पहचान -*

खोते  जा  रहा  है

इंसान  से  वो  शैतान

होते  जा   रहा   है

घर  – घर  मे  प्रेम  से

रहने  की  वजह  वो

अपनों   से   ही   पहले

लड़ता  जा  रहा  है

भाई – भाई  एक  ही

घर में जायदाद के  लिए

एक – दूसरे  का  दुश्मन

बनता  जा  रहा  है

इसमे   भी   ना  होता

मन   का , तो   वो

सड़क पर *-जानवर-*जैसे

लड़ा  जा   रहा   है ।

 

दूसरी  ओर   देश  मे  भी

जाति – पाति   के  नाम  से

द्वेष  फैलाया  जा  रहा  है

अपना  है  तो  उसे  बचाओ

पराये  को   बस

फसाया   जा  रहा  है

मेरे  देश  मे  ये  माहौल

क्या   हो   रहा   है

देश   की   बेटी   की

इज्जत  , देश   के   ही

इंसान  द्वारा  लूट  कर

मारा   जा  रहा  है

दुश्मन  किसे  कहे  अब

*-रमा-* देश  का  ऐसा

नजारा  हो  रहा  हैं ।

 

*5.कैद -*

 

सरहद  पर

परिंदो  को

देखकर

मेरा  मन

खुश  हो  गया

पंख  फैलाए  वो

घूम  रहे  थे

अपने  वतन  से

दूसरे   वतन

 

ना  कोई  उन्हें

*कैद*

 

करने   वाला

ना  उनसे  कोई

वतन पूछने  वाला

वो  दोनों  देशों  को

अपना  मान  कर

बेझिझक,निडरता से

उड़  रहे  थे

 

और  बुद्धिजीवी

मानव  को

मुंह  चिढाते

हुए  कह  रहे  थे

 

देख  इंसान

तेरी  करनी

क्या  ????

रंग  लाई   हैं

 

तू

बुद्धिजीवी  होकर भी

*-कैद-*  में  हैं

 

और  हम

आजादी   से

धरती  एक

एक  आसमान

परिंदे एक मानकर

सभी  में

प्रेम  रस  बरसाए  हैं

 

इसलिए  आजादी  से

हम , धरती – अंबर  में

पंख  फैलाकर

मस्ती  से  उड़

आज   पाए   है

 

लेकिन …….

इंसान

तेरी   बुद्धि  देखकर

बुद्धिजीवी  प्राणियों पर

हमें  आज  बहुत

तरस  आई   है

 

तेरी  बुद्धि  की

करनी  ने  आज

फिर  प्रश्न  चिन्ह

प्राणियों  में  लगाई  हैं।।

 

*6.भारतीय नारी की दशा-*

 

आज  भी  देश  की

अधिकांश नारी

आजाद  नहीं  हैं

ले  ले  वो  स्वंय

निर्णय

उसको  यह

अधिकार  नहीं  हैं

कहीं  नारी  स्वंय  ना  बढे

कहीं  नारी  ही

सब  पर  भारी  हैं

ये  मेरे  देश भारत  की

सच्ची  नारी  दशा

आज  भी  है

नारी  तो  नारी  होती

इसकी  इज्जत  भी

एक   सी   होती  हैं

लेकिन  इसको  भी

जाति – पाति , छोटे – बड़े

धर्म  – समाज में बाँट दिए हैं

मासूम , नादान , गरीब

बच्ची की भी इज्जत

लूट कर खूनी खेल खेले हैं

डरा  धमका  कर

माँ  बाप  को  भी

मारने की धमकी दिए हैं

आज  की  नारी

आसमान  में  अपनी

मेहनत  और  लगन  से

उड़  रही  है  ,  और

हर   क्षेत्र   में  बढ  रही  है

लेकिन  अपने  ही देश  की

धरा  पर   वो  *-रमा-*

पल – पल  में  डर  रही  हैं ।

 

*7.खुदा को नहीं माफ किया जाता हैं*

 

आजकल की  खबरें , सुन , पढकर

मेरा मन  पूरी  तरह  कांप  जाता  हैं

 

समाचार पत्रों और  टीवी चैनलो  में

देख दुनिया  का  हाल  डर जाता  हैं

 

अपने लोगों को बचाने  के लिए जब

दूसरों पर इल्जाम  लगाया जाता हैं

 

और तब  भी  मन  नहीं  भरता तो

बच्चों को शिकार  बनाया जाता हैं

 

दुश्मनी या हवस के लिए बलात्कार

छोटी बच्चियों  का  किया जाता हैं

 

जाति – पाति , ऊँच – नीच के भाव

नारी की लाज पर भी किया जाता हैं

 

सुनकर ये  सब भगवान ,अल्लाह

खुदा , ईश्वर को याद किया जाता हैं

 

लेकिन लगता अब नहीं कोई जग में

ये सब मुँह बंद कराने किया जाता हैं

 

ऐ खुदा अब लगता हैं  इंसानों का

तुझसे ना अब इंसाफ किया जाता हैं

 

औरो की बात नहीं अब *-रमा-* मुझे

खुदा को नहीं माफ किया जाता हैं ।

 

*-रमा प्रेम – शांति -*

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