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रागिनी स्वर्णकार शर्मा, इंदौर

Uncategorized सप्ताह का कवि विशेषांक

रागिनी स्वर्णकार शर्मा, इंदौर

Priti Surana June 16, 2018
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इस सप्ताह *सृजक-सृजन-समीक्षा विशेषांक* में प्रस्तुत है रागिनी स्वर्णकार शर्मा , इंदौर का परिचय, आत्मकथ्य व रचनाएँ। आप सभी की प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

*प्रस्तुतकर्ता*

*अन्तरा-शब्दशक्ति*

*परिचय*

 

नाम: – रागिनी स्वर्णकार (शर्मा )

जन्मतिथि: – 01/05/1972

माता -श्रीमति पार्वती

पिता -श्री पूरनचंद सोनी

पति-श्री अरुण शर्मा

पुत्र-कार्तिकेय 12 वर्ष

वर्तमान पता: – डायमंड रेसीडेंसी,सिलिकॉन सिटी राऊ, इंदौर(मध्यप्रदेश )

पद-हिन्दीव्याख्याता ,शासकीय विद्यालय में

शिक्षा.-बी.एस-सी., एम .ए. (हिन्दी साहित्य,इंग्लिश लिटरेचर ), एम.एड., शोधकार्य रत

विधा:  गीत,मुक्तक,दोहे अतुकांत ,ग़ज़ल ज्यादा नही आती कोशिश मात्र

संपर्क सूत्र (मोबाइल/व्हाट्स ऐप):  9754835741

१०.अणुडाक (ईमेल): ragini1572@gmail.com

*संकल्प* शालेय पत्रिका का सम्पादन सतत 8 वर्ष से

 

*साहित्य सम्पादक* संचार एक्सप्रेस(साप्ताहिक )

*साहित्य सम्पादक* निशात टाइम्स(साप्ताहिक )

इसके अतिरिक्त

लोकजंग,वर्तमान अंकुर,सवेरा,पत्रिका धार,भास्कर,नईदुनिया,देशबंधु

रीडर एक्सप्रेस में  400 रचनाएँ प्रकाशित।

रंगोली पत्रिका उत्तरप्रदेश

शब्दशिल्पी सतना

हिंदी सागर दिल्ली

सवेरा इन्दौर सहित्यसंगम

में रचनाएँ प्रकाशित ।

 

*एंटीकरप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की सदस्य*

सम्मान- 1 हिंदी सागर सम्मान

2 श्रेष्ठ युवा कवियत्री

सम्मान(विश्व हिंदी रचनाकार मंच द्वारा )

3 साहित्य अभ्युदय सम्मान 2018(साहित्य संगम संस्थान द्वारा )

 

पुस्तकें-  साझा सँग्रह

1   *भारत के युवा कवि एवं कवयत्रियाँ* (विश्वर हिन्दी रचनाकार मंच)

2    *अभ्युदय काव्यमाला*

(सहित्यसंगम संस्थान द्वारा )

(वुमन आवाज )

3 *नारी से नारी तक*

 

4 साहित्य शीर्ष परिषद भोपाल द्वारा  आगामी साझा सँग्रह

 

सँग्रह

*प्राण ढाल दो ज़िन्दगी में*

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा

*बेटियाँ*(वुमन आवाज द्वारा

आने वाला है )

आत्मकथ्य

 

ईश्वरीय सत्ता एवं नैतिक मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा ही मेरी ऊर्जा है ।सकारात्मक रहना एवम अन्यों को भी यथासम्भव वैसा बने रहने की प्रेरणा देते रहना ही मेरा प्रयास है ।

प्रेम ही सृष्टि का मूलाधार है,नींव है स्थायित्व है ।प्रेम से रिक्त जीवन,जीवन नहीं हो सकता । एक नवजात शिशु के मस्तिष्क पर माँ का ममता का प्रथम स्पर्श,प्रथम उपहार हुआ करता है ।

जब हृदय प्रेम की गहन अनुभूतियों से भर जाता है,

भावनाओं का बसन्त फूलों की मानिंद बिखर जाता है सृजन के आंगन में ।जब लगन असीम से हो फिर सृजन स्वतः होता चला जाता है ।

मेरी रचनाओं में हृदय की कोमल भावनाओं की अभिव्यक्ति भी है तो शिखर तक पहुंचने का संकल्प भी …..

मैं वो नही हूँ जो डर जाउंगी

मैं आंधियों से भी लड़ जाउंगी

 

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का निबन्ध कुटज में  अदना सा पौधा कुटज विपरीत परिस्थितियों में भी हँसते मुस्कुराते रहने की प्रेरणा  देता है ।अपराजेय जीवन शक्ति की घोषणा करता हुआ आकर्षक  कुटज कठोर पाषाण को भेदकर,वायुमंडल को चूसकर, आकाश को चूमकर उल्लास खींचता है ।

*जियो तो प्राण ढाल दो ज़िन्दगी में* कहता हुआ प्रतीत होता है ।

जीवन एक कला है ।

बहुत प्रभावित हूँ उस निबन्ध से ।महादेवी वर्मा मेरी पसन्दीदा कवियत्री हैं।

 

*जियो तो प्राण ढाल दो ज़िन्दगी में* ये मेरा पसन्दीदा वाक्य है ।

मैं लिखने के लिए नहीं लिखती ।

मेरे मन की एक विशेष  अवस्था होती है जब लिखे बिना नहीं रहा जा सकता उस समय जो भी अनुभूतियां होती हैं स्वतः कलम के माध्यम से उतरती चली जाती है पृष्ठों पर

वही कविता है ।

छंद,मात्रा बन्धन से परे सहज अभिव्यक्ति ।

उन्ही अनुभूतियों को मैंने आप सबसे बाँटने का प्रयास किया है।व्यक्ति सामाजिक प्राणी है।

समाज का समाज के लिए।

मैं भी अपनी अनुभूतियां समाज से बाँटना चाहती हूँ।और समाज के लिए जो उपयोगी हो ,सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो, जीवन के प्रति आस्था जगाए,

प्रेम का संचार करे ऐसे विचारों को रखना चाहती हूँ ।

 

*करो न क़ैद महलों में मुझे*

*झोपड़ी तक बिखर जाने दो*

*मैं तो रश्मि हूँ सूर्य की*

*घाव अँधेरों के सहलाने दो* ।

 

मेरी रचनाएँ मेरी धड़कने हैं जिन्हें आप महसूस कर सकते है।

मेरी अनुभूतियों को आप भी हृदय से अनुभूत  करेंगे इन्ही अपेक्षाओं के साथ कलम को विराम देती हूँ✍

 

रागिनी स्वर्णकार (शर्मा )

इन्दौर

 

रचनाएँ

1.

*चाँदनी रात और प्रतीक्षा तुम्हारी*

 

चाँदनी रात

और प्रतीक्षा तुम्हारी !

यादों में महकते तुम

खिलतें गीतों के ग़ुलाब !

चितवनें प्रतिबिंब लिए

प्रियतम का

तितलियों सी मंडराती

अपलक निहारती

रही चाँद को

अधर पी रहे चाँदनी ,

धीरे -धीरे धीरे- धीरे !!

उम्मीदों के जुगनू

रौशन अन्तरमन !

सिमटी एहसासों में !

स्नेह स्निग्ध धड़कन !

पल पल थमा सा

स्मृतियों की बाहों में !!

चाँदनी रात

प्रतीक्षा तुम्हारी !!

यामिनी व्याकुल सी

हुई जा रही क्षण- क्षण

चाँदनी सेज सजा रही !

खुशबू से भिगा रही!

तन मन पिघलता

तरल हुई जा रही !

वेदना कसकती

अंग -अंग पोर -पोर

चाहत दहका रहीं !

बासन्ती तमन्नाएं

पलाश हुई जा रहीं !

आओ प्रीतम

प्रेम शीतल चन्दन

तुम्हारी भुज पाशों में

चाँदनी रात

प्रतीक्षा तुम्हारी !!!

 

2.

*प्रिय तुम्हारी याद आई*

 

संसार ने जब जब सताया

प्रिय तुम्हारी याद आई

झूठा है जग ,सच तुम्ही हो

प्रिय तुम्हारी याद आई

 

प्राणों में नित बज रहीं हैं

मधु मृदुल सांसें तुम्हारी

दामिनीं सी कौंधती हैं

अंतर्मन में प्यासें तुम्हारी

नयन मेरे दीपक बने

पुतलियाँ बाती बनाई

प्रिय तुम्हारी याद आई ।

 

अनकहे उदगार हैं ये

भावों का विस्तार है ये

आँखों से अविरल अश्रु

ज़िन्दगी का सार हैं ये

एहसासों के पनघट ने

नेह की है धार बहाई

प्रिय तुम्हारी याद आई ।

 

कल्पनाएं खिल उठी हों

मुक्त हो स्वप्न जागरण जब

समंदर में हैं ज्वार उठते

लहरें बदलें आचरण जब

साहिल पर प्यास चली आई

दिल ने फिर आवाज लगाई

प्रिय तुम्हारी याद आई

 

काश ! कोई धुन छिड़े फिर

प्रीत की मनुहार हो जब

स्पंदन फिर शब्द शब्द का

गीत नवल श्रृंगार हो जब

सुर छिड़े फिर तन वीणा में

विरह रागिनी दी सुनाई

प्रिय तुम्हारी याद आई ।

 

3.

*मकरन्द*

 

मन का मकरन्द उड़ा

कली कली खिल गई ।

हवाओं ने प्यार किया

खुशबुएँ बिखर गईं।

 

भीगे भीगे मौसम का

सौंधापन भा गया ।

हरसिंगार हँस पड़ा

ग़ुलमोहर शर्मा गया ।

 

धीमी धीमी फुहार से

वादियाँ सिहर गईं ।

हवाओं ने प्यार किया

खुशबुएँ बिखर गईं ।

 

बदलियों का आँचल

हवाओं में उड़ गया ।

रेशमी अनुभूतियाँ

हृदय मचल मचल गया ।

 

अम्बर की धड़कन बढ़ी

बिजलियाँ सी गिर गईं ।

हवाओं ने प्यार किया

खुशबुएँ बिखर गईं ।

 

झीलों के दर्पण में

रूप का श्रृंगार हुआ ।

सरिता का वरण करने

सागर तैयार हुआ ।

 

लहरों के संग संग

भावनाएँ भी तिर गईं ।

हवाओं ने प्यार किया

खुशबुएँ बिखर गईं ।

 

4.

*नेह निमंत्रण*

 

भेज रही हूँ नेह निमंत्रण ,

मन चाहे तो पढ़ लेना ।

हर धड़कन पर नाम तुम्हारा

मन चाहे तो पढ़ लेना ..!

 

शब्दों के सब पुष्प हैं अर्पित

मन के महकते भाव समर्पित

हे प्रिये! कर स्वीकार निमंत्रण

चितवन हस्ताक्षर कर देना .. !

 

हर धड़कन पर नाम तुम्हारा

मन चाहे  तो पढ़  …………..!

 

फागुन के सब रंग मुबारक

नव रस से अनुबंध मुबारक

अंग-अंग नव छंद आज तुम

मीत प्रीत के गढ़ देना  ..!

 

हर धड़कन पर नाम तुम्हारा

मन चाहे तो पढ़ …………….!

 

5.

*दोहे*

 

मौलश्री सा मन हुआ तन होगया पलाश

नैनों में माया जगी,असर करे मधुमास

 

अधर अधर पर लिख रहे महाकाव्य जीवन्त

छंद छंद सी देह है रचनाकार अनन्त

 

तनमन सुरभित हो गया लगी प्रीत की  आस

अलकें अटखेली करें बढ़ती जाती प्यास

 

चूड़ी खनखन कर रही,बिंदियां है मदहोश

,धड़कन रचती रागिनी साँसे हैं खामोश

 

मन है मेरा बावरा,साँसों बसी सुगन्ध

धड़कन भीगी नेह से ,प्राण करें अनुबंध

 

चूड़ी कैसे चुप रहे ,चुप रहे बाजुबंद

फागुन दिल पर लिख रहा ,दहके दहके छंद

 

नैनों में माया जगी,मौसम की है चाल

चितवन प्यासी होगयीं,महके तभी रसाल

 

अधर हुए हैं सुर्ख तभी,सुर्ख पलाशी शाम

रचे कपोलों पर तभी ,मस्ती के आयाम

 

अधर अधर पर लिख  रहे ,महाकाव्य जीवन्त

छंद छंद सी देह है,रचनाकार अनन्त

 

फीके सारे लग रहे ,दुनिया के सब रंग

अंग अंग रंगीन है,प्रीतम प्रेम प्रसंग

 

6.

*मुक्तक*

 

जब जब भाव उमड़कर आते,

मन एक बिरवा बोता है ।

चाँद *सितारों* के आँचल में

छुपकर सपना सोता है ।

कोयल के गीतों से पूछो

पूछो आम पलाशों से,

मधु रितु के आने के पहले

पतझर कितना रोता है ।

 

 

7.

*वरदान बेटियाँ*

 

सुख की संभावना सी

ईश  की आराधना सी

साधना हैं जनमो की

अभिमान बेटियाँ ।

 

दोहे सी सरल हैं ये

जल सी तरल है ये

जीतें दिल हुनर से

ज्ञानवान बेटियाँ ।

 

सुंदर श्रृंगार सी हैं

फूलों के ये हार सी हैं

मूरत है ममता की

हैं नादान बेटियाँ ।

 

मेहंदी ,बिंदिया जैसी

भोर की निंदिया जैसी

पावन हैं प्रयाग सी

अरमान बेटियाँ ।

 

चाहे न बजाओ थाल

करेगी वही कमाल

शक्ति है शिव की वही

वरदान बेटियाँ

 

समस्या का *हल* हैं ये

आज औऱ कल है ये

मात पिता की ढाल हैं

प्रज्ञा वान बेटियाँ ।

 

मीरा की भक्ति भी देखो

लक्ष्मी की शक्ति भी देखो

साहित्य महादेवी का

हैं महान बेटियाँ

 

बड़ी ही सबल हैं ये

थोड़ी सी कोमल हैं ये

माँ भारती के भाल सी

हैं उत्थान बेटियाँ

 

*रागिनी स्वर्णकार (शर्मा) इन्दौर*

3 Comments

  1. Arpan Jain June 17, 2018

    उत्सवमूर्ति रागिनी स्वर्णकार जी का अन्तरा पटल पर अभिनंदन है|
    बेहतरीन आत्मकथ्य, जिसमें आपका कहना *’घाव अँधेरों के सहलाने दो’* बहुत ही प्रभावी है|
    आपकी रचनाएं-
    *1. चाँदनी रात और प्रतीक्षा तुम्हारी*
    सुन्दर प्रेम काव्य है… प्रभावशाली

    *2.प्रिय तुम्हारी याद आई*
    उत्कृष्ट रचना, दिवंगत कवि आशीष देवल जी की याद ताजा कर दी, उनका भी एक गीत है, *’प्रिये तुम्हारी….’*

    *3.मकरंद*
    सुन्दर शब्द चयन, बेहतरीन अभिव

    Reply
  2. रागिनी जी की कविताओं में भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति है। मधुर शब्द चयन हृदय को छू लेता है।
    जयन्त जोशी

    Reply
  3. Y M Kohli June 19, 2018

    Your Poetry is unique, very rytthmatic,meaningful, reaches hearts of other’s, arouses beautiful feelings and spreads good aroma all around. It’s awakening full of morals and love. In nutshell it’s all very very Lovely.

    Reply

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