दिखावे की ओर

बढ़ रहा था दिखावे की ओर शान ओ शौकत का मचा था शोर किसी का भी न चलता था ज़ोर आज घरों में वो बन्द हो गया प्रकृति का किया है शोषण कष्ट दिया नदियों को हरदम हर जानवर का किया है भक्षण आज मुख्य भोजन घरों में कन्द हो गया। पबों , नाइट क्लबों…

नववर्ष

नववर्ष आया भाई सबको देते बधाई बज रही चारों ओर खुशी की शहनाई हिन्दूओ का नववर्ष मनाये हम सहर्ष दीप जलाये द्वार पे रंगोली भी बनाई खुशियाँ मनाये हम तिलक लगाये हम सनातन संस्कृति की शुभ घड़ी है आई गुडीपडवा त्यौहार मानता है परिवार बम्हा ने सृष्टि रचके ये दुनिया बसाई शैल पुत्री अवतारी प्रति…

चिन्तन

चाहे अल्पावधि के लिए ही सही, स्वनिवास, अन्तर्मन में, पारदर्शी, नि:संदेह, सदैव ही था, अनायास, केंद्रित करने पर, अनुपम, अनुभूति, आनन्ददायी, निर्गुण, निर्मल। यूँ ही नहीं, कह गए, ॠषि मुनि, *तपस्या* की, महत्ता। विवेकपूर्ण व्यवहार, दानशीलता, विनयशीलता, संयम और स्वांकुश, अल्पाहार, मौनव्रत, स्वावलम्बन, उपासना, सरल हैं, किन्तु कठिन हैं, क्योंकि, यही तप है, योग है।…

यही तो तपस्या है

आज देश, दुनिया के लोगो पर संकट। ऐसी विपदा में चौबीसों घंटे, चौकस ,गली , सड़कों ,हर नुक्कड पर, तैनात वो कर रहे है ड्यूटी । भूल कर अपना सुख चैन , नींद ,भूख और प्यास । पूरी सतर्कता ,ईमानदारी से। निभा रहे भारत माँ के वीर अपना फर्ज। अस्पतालों में डाक्टर और नर्स ।अपनी…

मां तेरे आने से झूम रहा है संसार

जय आदि शक्ति जगदंबे मां जय जय संकट हरणी मां नौका पर होकर सवार आई मां खुशियों की उम्मीद ले आई हो मां “गर्भ दीप”जलाकर मां हाथ जोड़ विनती करती हूं, गरबा का रास रचाऊंगी , सखियों के संग मिलकर उम्मीदों का है दीप जलाया हे संकट हरणी आदि शक्ति मां आज मानव पर घोर…

दर्द प्रकृति का

प्रकृति हम इंसानों से बेहद नाराज हो गई है, देखो, इसलिए वो अपना असर दिखा रही है, आज बादल भी खूब जोर-जोर से गरज रहे है, देखो, आसमान में कैसी बिजली चमक रही है, कोरोना बनकर पृथ्वी पर आई भीषण महामारी जो है, हम सबके अंदर बहुत ही दहशत फैला रही है, प्रकृति परिवार के…

कोरोना से कैसे फिर लड़ पाओगे

एक एक से दूरी नहीं बनाओगे। कोरोना से कैसे फिर लड़ पाओगे। इसे तपस्या  मान जरा। गंभीरता  पहचान जरा। अपने संग में औरों की, अभीबचाओ जान जरा। लापरवाही यूँ ही यहाँ दिखाओगे। कोरोना से फिर  कैसे लड़ पाओगे। सरकारों का कहना है। दूर सभी से    रहना है। कष्ट उठा ले अभी जरा, फिर ये दुख…

चैत्र मास की संवेदनाएं

चैत्र मास की संवेदनाएं हम अंतस में भर लें आओ हम भी थोड़ा तप कर लें। चैत्र मास की प्रतिपदा को ब्रह्मा सृष्टि निर्माण किया हम भी दीन दुखियों का पेट भर लें, आओ हम थोड़ा तप करले। चैत्र मास में नवदुर्गा ने, भक्त रक्षा हेतु अवतार लिया हम भी कोरोना की पीड़ा जन-जन से…

नई आशा

नवसंवत् आया है नई आशा की किरण लाया है जीवन जोत जलेगी देश में ये संदेशा लाया है ये पर्व है माँ जगजननी का जो करती रक्षा दुष्टों से है करती है विनाश दानवों का ये सब संताप हर लेती अपने भक्तों का कठिन घड़ी है आन पड़ी विपदा आई भारी है हे जगदंबे उद्धार…

जरा सम्भल जाईये

इन इक्कीस दिनों में जरा सम्भल जाईये हों प्रार्थना के रंग सभी मिलके गाईये शुभकामनाओं के दिये रखना जलाकर कोरोना महामारी से बचिये बचाईये अब धर्म है हमारा यही अपनी तपस्या करें खुद की सुरक्षा से ही देश की रक्षा संकल्प लिए साथ सभी घर में ही रहकर कोरोना महामारी से बस जीत जाईये मीना…

मन का चतुर्मास प्यासा है

मन का चतुर्मास प्यासा है, पावस का घट रीत गया है। बेसुध होकर बूँदें थिरकीं हरियाली ने छेड़ा सरगम। सीले सीले दिन अलसाये, जागी सारी रातें पुरनम। अमराई में आ कोयल ने, गाया कोई गीत नया है। पावस का घट……….। लगा दिये अंबर ने कितने, वसुधा पर सावन के मेले। लेकिन यादों की पगडंडी पर…

तपस्या

इक्कीस दिन तक तप करना है प्रतिफल स्वस्थ बस देश चाहिए, कर बद्ध निवेदन सभी से एकता का जन जन से अब संदेश चाहिए। कोई न निकले बाहर तब ही होगा सफल अभियान हमारा, भारतीयता की पहचान यही है एक होना हमारा परिवेश चाहिए। जिस तरह लड़े थे आजादी पाने को आज से फिर से…