चैत्र मास की संवेदनाएं

चैत्र मास की संवेदनाएं हम अंतस में भर लें आओ हम भी थोड़ा तप कर लें। चैत्र मास की प्रतिपदा को ब्रह्मा सृष्टि निर्माण किया हम भी दीन दुखियों का पेट भर लें, आओ हम थोड़ा तप करले। चैत्र मास में नवदुर्गा ने, भक्त रक्षा हेतु अवतार लिया हम भी कोरोना की पीड़ा जन-जन से…

नई आशा

नवसंवत् आया है नई आशा की किरण लाया है जीवन जोत जलेगी देश में ये संदेशा लाया है ये पर्व है माँ जगजननी का जो करती रक्षा दुष्टों से है करती है विनाश दानवों का ये सब संताप हर लेती अपने भक्तों का कठिन घड़ी है आन पड़ी विपदा आई भारी है हे जगदंबे उद्धार…

जरा सम्भल जाईये

इन इक्कीस दिनों में जरा सम्भल जाईये हों प्रार्थना के रंग सभी मिलके गाईये शुभकामनाओं के दिये रखना जलाकर कोरोना महामारी से बचिये बचाईये अब धर्म है हमारा यही अपनी तपस्या करें खुद की सुरक्षा से ही देश की रक्षा संकल्प लिए साथ सभी घर में ही रहकर कोरोना महामारी से बस जीत जाईये मीना…

मन का चतुर्मास प्यासा है

मन का चतुर्मास प्यासा है, पावस का घट रीत गया है। बेसुध होकर बूँदें थिरकीं हरियाली ने छेड़ा सरगम। सीले सीले दिन अलसाये, जागी सारी रातें पुरनम। अमराई में आ कोयल ने, गाया कोई गीत नया है। पावस का घट……….। लगा दिये अंबर ने कितने, वसुधा पर सावन के मेले। लेकिन यादों की पगडंडी पर…

तपस्या

इक्कीस दिन तक तप करना है प्रतिफल स्वस्थ बस देश चाहिए, कर बद्ध निवेदन सभी से एकता का जन जन से अब संदेश चाहिए। कोई न निकले बाहर तब ही होगा सफल अभियान हमारा, भारतीयता की पहचान यही है एक होना हमारा परिवेश चाहिए। जिस तरह लड़े थे आजादी पाने को आज से फिर से…

शपथ

तपोभूमि के धरतीपुत्रों, तुम्हें तप अब करना होगा, वन-कंदरा, प्रकृति को छोड़, समाज से निर्वासित होना होगा. मानव जाति है खतरें में आज, विकट विषाणु कण-कण में है, अदृश्य-अज्ञात वह छुपा कहां, पहचानता नहीं उसे कोई जन है. संहारक तांडव मचा रहा जग, विज्ञान है बौना उसके समक्ष. डरा-सहमा ठहरा है हर प्राणी ऊहापोह में…

जय अम्बे माँ

हे जगत् जननी, हे अम्बे दयालु, अपनी ममता का आँचल, पसारे ही रखना।। वो माँग का टीका, और माथे की बिंदिया, मेरे माँग का सिंदूर, सजाये ही रखना।। अपनी ममता का आँचल, पसारे ही रखना। वो नाक की नथनी, और कान के झाले, मेरे गले का हरवा चमकाये ही रखना।। अपनी ममता—— वो बाजू बंद,…

‘तप अपेक्षित है’

शुद्ध चित्त से ये दृढ संकल्प अपेक्षित है तन से, मन से और विनय से तप अपेक्षित है सर्व कल्याण की इच्छा हो,अहं का त्याग करें हम सब निज स्वार्थ से परे कोई ढूंढें विकल्प अपेक्षित है बस ये संकल्प अपेक्षित है संतुलन है मांग समय की अब,पाया है जो लौटायें भी हो दान अधिक…

सच्ची राष्ट्र भक्ति

तप इच्छा निरोध करना किन्तु तप इच्छा दफन नही करना तप तब संयम बिन नही अतः तप अंतर डूब सदा करना तप त्याग बिना कैसे संभव तप राग सहित भी न होता तप वीतराग मय भाव तभी तप संतप्त तपस्वी के होता तप तन मन दोनो से होता तप तभी श्रेष्ठतम फलदायी तप कर्तव्य मार्ग…

तप का प्रतिफल

पहरेदार है अडिग हिमालय , गंगा जिसकी आत्मा है । क़ाबा से कैलाश तक यहां, कण कण में परमात्मा है ।। जिसकी संस्कृति महान है । ये मेरा हिंदोस्तान है ।। अहिंसा की तपोधरा है , भंडार रत्नों से भरा है । पावन भूमि ऋषियों की, दिन रात जिन्होंने तप करा है ।। —- भरत…

तप

समय आज का किसी तप से कम नहीं है रहना घर में तो क्या कोई गम नहीं है जब लड़ना हो युद्ध अपने/अपनों के और राष्ट्रहित में तो लक्ष्मण रेखा को अभी पार करना नहीं है सुरक्षित रहें और घर में रहें अकारण अभी घर से निकलना नहीं है सौभाग्य मिला है राष्ट्र हित में…

समय की माँग

नया साल अपनी दस्तक संग, सबको समझा रहा है आज, सारे घर पर कुछ दिन रह लो, तब होगा सब पर उपकार। माँ आ गई हैं घर के मंदिर, पूजा वंदन कर लो आज, माँ तो सबकी रक्षा करतीं, पावन मन से कर लो जाप। अपनों से अपनत्व निभाकर, सबका ख्याल करो सब आज, घर…