सूरज देता तेज और उल्लास
बढ़ता शक्ति का संचार।
प्रकृति में संवर्धन होता जब,
लय प्रवाह गति होती अपार।
हरियाली बढ़ती धरा पर,
खुशी संग समृद्धि की बहार।
जन जीवन उमंग से उल्लासित,
जहां-तहां रौनक खुशहाल।
बच्चे युवा वृद्ध जन सारे,
हर्षमय दिखता संसार।
नील गगन का सूरज ही तो!
इस सृष्टि का मूल आधार।
सदियों से सूर्योदय की ही,
वंदन- पूजन-महिमा अपार।
-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
