मित्र हमारे लिए , हमारा जीवन है ।
मित्र ही , हमारे प्राणों का मधुवन है।।
आती जाती साँस , राधिका -गोपी हैं।
मित्र कृष्णमय , ओतप्रोत वृंदावन है ।।
मित्र मित्र के , जीवन का संरक्षक है।
जीवन-रक्षक मित्र , मित्र अनुशासन है।।
मित्र के सामने , जग- सत्ता बौनी होती ।
मित्र , प्यार का सर्वश्रेष्ठ इंद्रासन है ।।
मित्र शब्द का सही अर्थ सब भूल रहे ।
मित्र शब्द अब स्वार्थसिद्धि का भाषण है।।
दुनियावालों समझो ‘मित्र ‘शब्द का अर्थ।
कृष्ण -सुदामा जैसा मित्र – प्रकाशन है ।।
-जानकीप्रसाद विवश
