जीना – मरना ही है जीवन का नाम,
जिंदा हो जब तक तो यही रखता है तुम्हारा काम,
जब तक सांस है तो सोचते हो लाभ और हानि,
दो पल रुक जाओ कल क्या हो किसी ने न जानी।
सारी गणित बेकाम हैं,
जिंदगी बस सुबह और शाम हैं,
हाथों की रेखाएं नादान हैं,
यह जीवन एक वरदान है।
जीना तुम्हारे हाथ में है,
यमराज तुम्हारे साथ में है,
संवारना बंद करो अपनी काया,
मत सोचो कि तुमने क्या खोया, क्या पाया।
तुम्हें किस बात का एहम है?
तुम अमर हो यह तुम्हारा वहम है,
मृत्यु का दूत है तुम्हारे बगल में,
झोपड़ी में रहो या रहो महल में।
-प्रणव राज
बिहार
