किताबें ही हमें अन्याय से लड़ना सिखाती हैं.
घिरे हों जब अकेले हम,कभी दुनियां के मेले में,
किताबें मित्र बन, विश्वास दे, अपना बनाती हैं,
किताबें लेखनी के मर्म को पढना सिखाती हैं,
किताबें ही सदा साहित्य का गौरव बढ़ती हैं.
किताबें ही हमें अन्याय से लड़ना सिखाती हैं.
मिला हैज्ञान ईसाका,कुरआनऔर बाइबिल जन्मे,
किताबों ने सुनाये कृष्ण के उपदेश गीता में,
किताबें ही हृदयमे बुद्ध की करुणा जगाती हैं,
किताबें ही हमें अन्याय से लड़ना सिखाती हैं.
घिरा अज्ञान -तम,जब राह कोई मिल नहीं पाए,
उन शब्दों ने हमेशा ज्ञान का दीपक जलाया है,
किताबें शक्ति हैं,विश्वास का संबल मिलाती हैं,
किताबें मातृ भू के भाल पर कुंकुम सजाती हैं,
किताबें ही हमें अन्याय से लड़ना सिखाती हैं.
ये अक्षर बोलते हैं तब कोई इतिहास बनता है,
अधूरी सभ्यताओं पर नया विश्वास पलता है,
न मिलती सभ्यता को राह, संस्कृति ही कहाँ होती?
अधूरा ज्ञान, विकृत चेतना ,दुर्भावना पलती
किताबें ज्ञान के शुभ भाल पर चंदन रचाती हैं
किताबें ही हमें अन्याय से लड़ना सिखाती हैं।
-पद्मा मिश्रा.जमशेदपुर
