सबका जीवन बदलता, हुआ समय का फेर।
संचित सारे कर्म फल, मिलते देर -सवेर।।
मिलते देर – सवेर, निराशा कभी न पालो।
सुखद बने प्रारब्ध, कर्म रत समय न टालो।।
राजा बनता रंक,फलित श्रम होगा कब का।
कभी धूप तो छाँव,बदलता जीवन सबका।।
चाहे जैसा हो समय, सदा लगा प्रभुु टेर।
सबकी सुनते ईश हैं,पड़े समय का फेर।।
पड़े समय का फेर, सहायक प्रभुवर प्यारे।
गति मति जीवन मोक्ष, कर्म से भाग्य सँवारे।।
जग-अनुभव धन – कोश,पड़ा है रोता काहे।
निश्चय सतत् प्रयास , दिला दे जो तू चाहे।।
-अमिता रवि दुबे
छत्तीसगढ़
