अब कोई हालत भी नहीं है

साहिल की हमें अब कोई चाहत भी नहीं है ।
कश्ती को समंदर से शिकायत भी नहीं है ।

अब प्यार मिले या ना मिले फ़र्क़ नहीं कुछ ।
अपना ले कोई हमको ये हसरत भी नहीं है ।

अब ना तो मुहब्बत है हमें आपसे बिल्कुल ।
औ दिल में हमारे कोई नफ़रत भी नहीं है ।

दीवार उठा दी है यहाँ आपने ऊंची ।
ख़ुशियों के परिंदों के लिये छत भी नही

हम जिसके हुए उसने कोई क़द्र नहीं की ।
हम आपके हो जाएं ये किस्मत भी नहीं है ।

तस्वीर नहीं है कोई उस शख़्स की अब तो ।
हाथों से लिखा उसका कोई ख़त भी नहीं है ।

कुछ और सहेजूं मैं मेरी रूह को मुझमें ।
ऐसी तो मेरी अब कोई हालत भी नहीं है ।

-कमलेश श्रीवास्तव

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