मुझे आँचल में अपने अब छिपाने कौन आयेगा
मुझे गा गा के लोरी फिर सुलाने कौन आयेगा
मुझे बाहों का झूला अब झुलाने कौन आयेगा
मुझे परियों के किस्से फिर सुनाने कौन आयेगा
बता ना माँ सिवा तेरे बताने कौन आयेगा
मेरी आँखों को ये दुनिया दिखाने कौन आयेगा
बनी मैं अक्स तेरा माँ तेरी पीड़ा समझती हूँ
तेरी अग्नि परीक्षा में मैं तेरे साथ जलती हूँ
तेरे हर दर्द से वाकिफ़ तेरे साँचे में ढ़लती हूँ
तेरे हर आँसुओं पर साथ तेरे मैं बिलखती हूँ
तेरा अस्तित्व मेरा हक बचाने कौन आयेगा
मेरी आँखों को ये दुनिया दिखाने कौन आयेगा
बता ये आदमी की जात भी कब तक सलामत है
बता हम बेटियों से कब तलक इसको अदावत है
बिना नारी के इसकी क्या कहीं उम्दा हिफाज़त है
हमारी ज़िन्दगी क्यों आज नज़रों में कयामत है
ज़माने से बुराई को मिटाने कौन आयेगा
मेरी आँखों को ये दुनिया दिखाने कौन आयेगा
-दिनकर राव दिनकर
