अनकहे शब्दों की माला है कविता

अनकहे शब्दों की माला है कविता
मन के बहते भावो की सरिता है कविता
अनबुझी कितनी ही पहेलियाँ सुलझाती है कविता
कितने ही उलझे हुए सवालों के जवाब है कविता
भूत वर्तमान और भविष्य का दर्पण है कविता
जीवन और साहित्य का समर्पण है कविता
अंतस के चलते अंतर्द्वंद का समाधान है कविता
खुशियों और गम को दर्शाने का माध्यम है कविता
रूठे हुए अपने परायों को मनाने का जरिया है कविता
प्रेम के इजहार इकरार का तरीका है कविता
भाई बहन के रिश्ते की प्यारी डोर है कविता
माँ की ममता भरी सुरीली लोरी है ये कविता
वीरो की वीरता के साहती किस्से सुनाती है कविता
जीवन की सारी करुणा समेटी हुई गागर है कविता
अनगिनत आँखो के ख्वाहिशों का समंदर है कविता
कितने ही पुराणों का बखान है कविता
तंस और हास्य व्यंग्य का मंच है ये कविता
कितने ही रस छंदों से बुनी चादर है ये कविता
क्यूँकि ,,
स्याही से नहीं एहसासों से लिखी जाती है कविता ।
किसी एक की मिल्कियत नहीं है ये कविता
जो एहसासो को पिरोये गुंथे उन सब की है कविता

-स्मृति गुप्ता
जबलपुर (म.प्र.)

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