आ जाएगा

मौसम कैसा भी हो, ढलना आ जाएगा।
क्या धूप क्या छॉंव, चलना आ जाएगा।

सफ़र करते-करते यहॉं तक आ गए।
आगे भी मंज़िल तक पलना आ जाएगा।

-मनीष कुमार पाटीदार

एक उत्तर छोड़ें

अन्तरा शब्दशक्ति – हिन्दी साहित्य, प्रकाशन और रचनाकारों के सशक्तिकरण का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच।
संपर्क करें
antrashabdshakti @gmail.com
Call- 9009423393
WhatsApp-9009465259
antrashabtshakti.com

Copyright © 2026 Antra Shabd Shakti. All Rights Reserved. Powered by WebCoodee