एक दिन हम जुदा हो जायेंगे,
ना जाने कहाँ खो जायेंगे।
तुम लाख पुकारोगे हमको,
लौटकर हम ना आयेंगे।।
थक-हार के दिन के कामों से,
जब रात को सोने जाओगे।
जब देखोगे अपने फोन को,
पैगाम मेरा ना पाओगे।।
तब याद तुम्हें हम आयेंगे,
पर लौट के ना आ पायेंगे।।
इक रोज़ ये रिश्ता छूटेगा,
फिर कोई ना हमसे रूठेगा।।
पर हम ना आँखें खोलेंगे,
तुमसे कभी ना बोलेंगे।।
-शिवशंकर दुबे गंगेले
वारासिवनी, जिला बालाघाट
