ख्वाब आँखों में टिकता नहीं है

ख्वाब आँखों में टिकता नहीं है |
वो जमीं पर उतरता नहीं है ||

दिल हमारा हुआ सख्त कितना |
फूल जीवन में खिलता नहीं है ||

साथ दुख अब कदमताल करता|
खुशनुमा पल ठहरता नहीं है ||

कर के कोशिश बहुत थक गया मैं |
वक्त मेरा बदलता नहीं है ||

कैसे उल्फ़त उन्हें हो भला अब|
इश्क़ पत्थर में घुलता नहीं है ||

हारता मैं रहा हर कदम पर |
क्यूँ नसीबा चमकता नहीं है ||

भोर होती नहीं घर मेरे अब ,
क्यूँ ये सूरज निकलता नहीं है ||

अब खिजाँ ‘अब्र’ के संग रहती |
दिल का मौसम बदलता नहीं है|

-अजय कुमार मिश्र ‘अब्र’

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