जाने क्या क्या इस जीवन में छूट गया
तुमसे मेरी इक अनबन में छूट गया
मन करता है उसको भूल भी जाऊं अब
पर मन भी तो उसके मन में छूट गया
गाना,नृत्य,कलम,कविता,मन,साथ सखी
सबकुछ ही रोटी परथन में छूट गया
उसको क्या छोड़ोगे तुम जिसका सबकुछ
बाबा की तड़पन धड़कन में छूट गया
सोचा जल्द बड़े हो देखेंगे दुनिया
जो सुंदर था सब बचपन में छूट गया
-पूजा शुक्ला
