मन में बहार आईं, जब-जब सुमन खिले
सूनी-सूनी राहों में, खुशियों के दीप जले
महकी महकी शाम ढले, चाँद नज़र मुस्काए
धीरे धीरे पायल की, मीठी धुन सुन जाए
भीगे – भीगे मौसम में, सपने नए पले
मन में बहारें आईं , जब-जब सुमन खिले
फूलों जैसी कोमलता, हर दिल में बस जाए
टूटी-टूटी उम्मीदों को, फिर जीना सिखलाए
सूने मन के आँगन में, प्रेम की धार चले
मन में बहारें आईं, जब-जब सुमन खिले
सारे दर्द मिटाकर हम, खुशियाँ गले लगाएँ
थाम के दामन उम्मीदों का, हम आगे बढ़ जाएँ
मधुर स्वरों की बारिश हो, मधुरिम शाम ढले
मन में बहारें आईं, जब- जब सुमन खिले
-सुमंगला सुमन
