“सोना – कनक – स्वर्ण”
जब मिलता है सोना,
रेत जैसा दिखता है।
चमक उसकी बताती है,
पहचान अभी उसकी बाकी है।
लाखों परीक्षा के बाद पहाड़ से,
मुट्ठी भर रेत जो सोने सी दिखाई देती है।
फिर छन कर ,गलकर तपकर कहीं वो,
सोने की कीमत पाता है।
सीख यही दे जाता है,
कुछ नहीं तुम,
जब तक कसौटी पर न कसे जाओ,
भीड़ में एक हो तुम,
जो खुद को साबित न कर पाए।
जिंदगी में हमेशा उजाला नहीं होता,
काली रात से जो न हो सामना,
सूर्य अपनी रोशनी से रुबरु नहीं करवाता।
जो नहीं मिला तुमको,
उसका अफसोस जताना बंद करो।
जो सवेरा आने वाला है जिंदगी में,
उसके लिए खुद को तैयार करो
-सोनम लड़ीवाला
जयपुर (राजस्थान)
