सितारे गगन के

जो दुनिया से दूर जाता है
कहते हैं कि वो अम्बर में
एक चमकता सितारा बन जाता है
क्या तुम भी………
आकाश में कोई सितारा बन गए

जब से तुम गए हो
……….हर रात मैं
सिर उठा कर…….
नीले आकाश की ओर
घंटों तुम्हें तलाश करती हूँ
गगन में चमकते
चांद से
तुम्हारा पता पूछती हूँ

हर सितारे में
तुम्हारा अक्स
ढूँढती हूँ
टिमटिमाता
हल्की रोशनी वाला सितारा
तुम नहीं हो सकते
क्यों कि तुम तो
पहले भी सितारे थे
ज़मीं पर
एक चमकते सितारे
खूबसूरत से…….
भव्य और तेज़
रोशनी से दमकते
जिसे देख लोगों की
आँखें हैरत में पड़ जाती

कुछ टूटते… दूर तक
रेखा बनाते सितारे
दिखते हैं दूर गगन में
जिनको देख कर मैं
मांगती हूँ मन्नत
फिर मिलो……..
अगले जन्म में…….
रहूंगी सदैव
तुम्हारी प्रतीक्षारत
हर जन्म में………

कुछ तेज रोशनी से
जगमग करते सितारों में
मैं तुम्हें देखती हूँ
उन में से एक तुम हो
बेहद खूबसूरत से
व्याध तारे की तरह
लगते हो जैसे , जो
कांतिमय और दीप्तिमान
रात की स्याहवह
आभामंडल में दमकते
ज्योतिपुंज सा दिव्य
प्रकाशमान
अलौकिक
……….प्रखर
दिन में भी गोचर
सबसे अलग और
विशेष सितारा होता है।
अवश्य ही गगन में भी
ज़मीं के सितारे की तरह
अपनी भव्यता से तुमने
एक नया कीर्तिमान
बनाया होगा…….।।।

-प्रो. ( डॉ.) मंजू वर्मा
रिटायर्ड प्रोफेसर पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़

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