अपनी किस्मत की लकीरें

अपनी किस्मत की लकीरें
अपने हाथों से लिख ले
मेहनत से आसमान छू ले
तू अपने काम से जाना जाऐगा
लोग प्रेरणा ले रहे होंगे तुझसे
समाज में तू सम्मान पाऐगा
अपने पैरों पर खड़ा होने का हुनर
सूझ-बूझ से ही तू जान पाऐगा
परिश्रम से ही पारसमणि हाथ आऐगा
आलस्य छोड़कर बढ़ मंज़िल की ओर
कहानी का लेखक और किरदार तू बन जाऐगा
अपनी तकदीर है हाथ में तेरे
हौंसलों की उड़ान भर आस पर विश्वास रख
भीड़ का हिस्सा बन कर व्यर्थ ना समय गवां
चलता चल राह में चाहे कारवां हो छूट रहा
सपनों को पूरा कर, कल सुनहरा भावि पाऐगा
देश का नाम कर रोशन प्रगति की ओर कदम बढ़ा –।

– निकुंज शरद जानी

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