यूनानी महाकाव्य इलियड जो कवि होमर द्वारा रचित है,का अध्ययन करने पर जिस चरित्र ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वह हैक्टर । इलियड पर आधारित ट्रोजन ट्रेजरी पर बनी जितनी मूवी, टीवी सीरीज है, सबसे ज्यादा प्रभावशाली फ़िल्म वुल्फगैंग पीटरसन द्वारा बनाई गई हेलन ऑफ़ ट्रॉय है। इस फिल्म को अन्य फिल्मों के मुकाबले बेहतरीन माना जाता है। फ़िल्म फ्रेम दर फ्रेम जुड़ती है पात्रों से ,हर पात्र मानो उस इतिहास को उस वक्त को जी रहा है। हमारी आंखें किरदार में बस जाती ,आंखों के सामने पूरा नाटकीय अंदाज जीवंत लगता है।
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मानवीय स्वभाव संरचना ,देश ,काल ,परिस्थिति को मुख्य नायक ब्रेड पिट (एक्लिक्स)और एरिक बना(हैक्टर) ने अभिनय में जो जिया है वह बेमिसाल है। अन्यंत्र कहीं उसकी मिसाल नहीं है।असली जिंदगी में वह संभवत यूं ही रहे होंगे( आंखों से कहने वाले)। कहानी में प्रेम को रचने वाले पेरिस और हेलन भी बस कहानी के जरूरी पात्र भर नजर आते है। जबकि दोनो ओर से हैक्टर, एक्लिक्स जो सिर्फ योद्धा है,पूरी फ़िल्म की लाइफ लाइन है।
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आप फिल्म को देखेंगे तो उस समय के वस्त्र, आभूषण, रखरखाव महल जीवन शैलीआदि को देखकर ऐसा लगता है कि डायरेक्टर इस फिल्म के लिए पूरी जान लगा दी। मानो पीटरसन जीवन का एकमात्र शाहकार बना रहे हों। पीटरसन ने छोटी से छोटी चीजें चाहे वह लकड़ी का नकली घोड़ा बनाकर ट्रॉय शहर के अंदर घुस आना हो ।चाहे वह हेलेन की खूबसूरती को बयां करना हो। वह टापू पर बने महल को दिखाना हो हर छोटी से छोटी चीज पर बहुत शोध के साथ फ़िल्म बनाई।
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फिल्म शुरू होती है ट्रॉय के दो राजकुमार हैक्टर और पेरिस के स्पार्टा के यात्रा के दौरान। यात्रा के दौरान पैरिस -हेलेन से मिलते हैं और जो एगमैनन की पत्नी है। (एगमेनन जो स्पार्टा(पार्ट ऑफ ग्रीस) के राजा मेंएल्युस के भाई है।)लेकिन वह पेरिस के साथ जहाज में छुपकर भाग आती हैं। बीच समुद्र में जब हैक्टर को पता चलता है तो वह बहुत नाराज होता है। साथ ही उसकी दूरदृष्टि या देख लेती है, कि ट्रॉय का विनाश निश्चित है। किंतु हेलन और पेरिस के इश्क के आगे प्रियम(पिता) और हैक्टर(बड़ा भाई) दोनों ग्रीक स्पार्टा के नायकों से युद्ध लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। किंतु एक्लिक्स के रूप में स्पार्टा के योद्धाओं में बहुत जांबाज योद्धा मौजूद है। वह उस युद्ध की जान है।उसके शौर्य के कारण ही ट्रॉय हारा । एक्लिक्स ने हैक्टर की चचेरी बहन को बंदी बनाकर रखा है जिससे वह प्रेम करता है। एक्लिक्स की भूमिका हैक्टर की भूमिका से ज्यादा दमदार है। किंतु हैक्टर के किरदार की वजह से एक्लिक्स की बहादुरी भी फीकी पड़ जाती है।
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कहानी चलती है युद्ध होता है युद्ध में बताया गया है कि प्रियम किस तरह एक बूढ़े लाचार हो चुके राजा की तरह ही व्यवहार करते हैं। वह हैक्टर को अपनी भूमिका निभाने नहीं देते हैं ।और यूनान के प्रसिद्ध पुजारियों के कहने पर कि पंछी शगुन आपशगुन लाते हैं, उसकी मान्यता पर डटे रहते हैं । इसकी वजह से युद्ध होता है, और हैक्टर मारा जाता है एक्लिक्स के हाथों ।किंतु अंत में पैरिस एक्लिक्स को मारकर अपने भाई का बदला तो ले ही लेता है । हर चीज इतनी महीन कलाकारी से बुनी हुई है , कि विश्वास नहीं होता है यह फ़िल्म दो देश के बीच एक स्त्री के जीतने वाले युद्ध के तौर पर दिखाई जा रही है । यकीं तो तब होता कि ,ट्रॉय जल रहा,ट्रॉय के परिसर में युद्ध के प्रमुख योद्धा एक्लिक्स की चिता जल रही होती है। यूनानी कल्चर में,चिता जलती ,बारह दिन का शोक होता ,और मृत व्यक्ति की आंखों के ऊपर दो सिक्के रखे जाते।
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जब हैक्टर की आंखों पर सिक्के रखते राजा प्रियम तब ह्रदय व्यथित होता,किन्तु जब एक्लिक्स कि आंखों पर सिक्के रखे जाते,तब ह्रदय चीत्कार उठता। फ़िल्म में राजा प्रियम की तो चिता को भी जलता नही बताया गया।
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हम हेलन की बात करे तो वह आज भी विश्व की बेहतरीन खुबसूरती में गिनी जाती है। उनका रूप मानो कोई अप्सरा,अल्हड़ नदी,भोर की उजास,शाम के सुनहरे बादल,हिरणों सी चपलता। किन्तु यही रूप मैग्नस के पास सुखी नही था,उसे पेरिस जैसा बांका, राजकुमार,प्रेमी चाहिए था। जिसके साथ वह भाग जाती है,और भागते कदमो से ट्रॉय का जलता नसीब लिख देती,और कारण बनती दो श्रेष्ठ योद्धाओं(एक्लिक्स और हैक्टर)का। ग्रीक किवदन्तियों में कई जगह हेलन को काल्पनिक माना, किन्तु कवि होमर ,अपनी रचना इलियड में उसके सत्य के प्रमाण देते है।
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राजा प्रियम के साथ ब्रैड पिट (एक्लिक्स)के संवाद अद्भुत है। एरिक बना ने हैक्टर की भूमिका में जान डालकर एक्लिक्स बने ब्रेड पिट को फीका किया है। हैक्टर का मातृभूमि प्रेम, शांति की खोज,भविष्य का होने वाला राजा , राजनीतिज्ञ, आदर्श पति ,आदर्श आज्ञाकारी पुत्र, योग्यताओं से पूर्वी परिपूर्ण सेनापति और श्रेष्ठ योद्धा सब उनकी आंखों से बयां होता है। दृश्य दर दृश्य ऐरिक बना की आंखों से ही अभिनय करते नजर आते हैं । मृत्यु ,दर्प, वीरता ,दर्द पीड़ा, त्याग व्यग्रता सब कुछ उनकी आंखों से छलक कर बाहर आता है। हैक्टर की जिंदगी का अंतिम दृश्य तो अद्भुत है जब वह महल की छत पर खड़े धनुर्धरो को एक्लिक्स पर बाण छोड़ने से मना करता है ,यह जानते हुए कि वह मरने जा रहा है ।वह निर्विकार भाव से बाहर आते हुए उत्तर में केवल यह बताता है, कि ना तो वह मृत्यु से भयभीत है न ही एक्लिक्स से ।
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पूरी मूवी में मुझे एक ही कमी महसूस हुई अंतिम प्रणाम में हैक्टर(एरिक बना) को अपने पिता की आंखों में झांक कर यह बताना चाहिए था- कि उसकी मृत्यु के कारण वे स्वयं हैं, क्योंकि उन्हें उसकी रणनीति से ज्यादा पुजारियों के पंछी शगुन-अपशगुन पर विश्वास था।
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फिल्म में जब हेलन के पति मैगनम बूढ़े प्रियम की भाला भोंक कर हत्या करता है ,तो सहानुभूति नहीं होती। ट्रॉय जला उसे तो जलना ही था ,भले ही इलियास द्वारा उसे रोम के रूप में पुनर्जीवित किया गया हो। हजारों योद्धाओं की मौत व्यथित करती है । किंतु हेक्टर की मौत टीस बन जाती है।
-रूचि बाजपेयी शर्मा
