पंक्ति पर काव्य रचना
मंजिल दूर मुश्किल ही सही
राह भी पथरीलें ऊंचे नीचे सही
कदम भी थके -थके चूर सही
हौसला रख मुश्किलों को
मुस्कुराकर आसान कर देगें ||
जिन्दगी दुख का साया सही
परेशानियाँ का डेरा सबेरा सही
तूफानों से घिरे कर्म ही सही
विश्वास तो रख मुशकिलों को
मुस्कुराकर आसान कर देगें||
जीवन एक पतवार है सही
डगमग नाव साहिल पर सही
भवर से किनारा लगाना सही
धैर्ये रख मुश्किलों को
मुस्कुराकर आसान कर देगें||
जीवन की नैया को भवसागर
से पार कर देगे,
मुशकिलों को मुस्कुराकर
आसान कर देगें||
-ऊषा नौगरहिया
कटनी
