कजरारे नयनों ने मस्ती भर
सुर्ख अधरों से कुछ कहा है
झूमते कुंडलों ने सुना है प्रेम
गालों की लाली शर्मा रही है।
मुस्कुराहट तेरी जता रही है
बातें थी जो दिल की दिल से
भोली सूरत तेरी सुना रही है।
कब तक रोकूं मैं धड़कनों को
इशारे भौहों से तू बता रही है
उम्मीदें भरके केश सजे आज
बिंदिया तेरी मुझे बुला रही है।
-संदीप नेमा दीप
भोपाल
