रूहानी तौर पर ही सही,
प्यार को पाया तो है।
ख्यालों में ही सही,
इस जिंदगी को जीया तो है।
जो जज़्बात इस दिल में है,
वही धड़कन उधर भी है
मजबूरियों के सिलसिले,
इधर भी है, उधर भी है।
एकतरफा नहीं, दो तरफा है
यह सिलसिला हमारा,
होंठों ने कुछ कहा नहीं,
पर दिल ने सब सुना तो है।
हाँ, मैंने उसे चाहा है,
हाँ, उसने मुझे चुना तो है।
हम कभी मिलते नहीं, न सही,
चाहत में पर कोई कमी नहीं।
तन की दूरी का मोल क्या,
जब मन से मन जुड़े हो कहीं।
हम कहते नहीं, पर समझते हैं
एक-दूसरे के दिल में रहते हैं।
सदियों के इस एहसास पर
हम जीतें और मरते हैं।
-कल्याणी झा
