करो उपकार

“गौरैया की प्यास”

चिड़िया के पर होते लेकिन,
मौसम बदले रूप को देखो!
उस नन्हीं गौरैया ख़ातिर !
थोड़ा दाना पानी रख दो |

फुदक -फुदककर वह गौरैया ,
जब दाना खाने आ जाएगी ।
बिन बोले आशीष दुआएँ,
ढेरों तुमको दे जाएगी ।

उन दुआओं की छतरी जब,
तुम्हरे सिर पर तन जाएगी।
आती हुई तब कोई मुसीबत ,
द्वार तुम्हारे ना आएगी।

दुआओं में होती ताकत,
जीवन की सच्चाई है ।
पर उपकार करो मानव तुम,
यह तो एक भलाई है ।

-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)

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