मन चंचंल है कर लो ध्यान
साधु संतो का यही है ज्ञान
स्वयं की स्वयं से कर लो प्रीति
स्वाशों से स्वाशों की स्वनाभूति
निरंतर अभ्यास से मिलेगा ज्ञान
मिटेंगे जीवन के सारे अज्ञान
धीरे धीरे छूटेंगे मोह के बंधन
जड चेतन में दिखेंगे रघुनंदन
गुरू कृपा से संभव अनुभूति
प्रण करने से होगी स्वानुभूती
-अर्चना कटारे
