उलझन

घनश्याम काम से घर लौटा तो कमला कहीं नहीं दिखी न ही बच्चे। बाहर जा कर देखा और पड़ोसियों से पूछा तो राजू ने बताया कि कोई लड़का मोटर साइकिल से आया था, उसके साथ भाभी जा रही थी तो मैनें पूछा भी कि घनश्याम को बताकर जाना, तब भाभी बोली कि ये हमारे गाँव का लड़का है इसे बाजार से कुछ सामान लेना है इसलिए मुझे ले जा रहा है, तब मैने कहा बच्चों को तो छोड़ जाओ, लेकिन उसका कहना था कि अभी आते हैं और वो चली गई।
सांझ ढलने को आ गई कमला को वापस आया न देखकर घनश्याम को खटकने लगा, वो अंदर अलमारी में देखने गया तो, उसके पाँच हज़ार गायब थे और उन सबके कपड़े लत्ते भी।
घनश्याम सिर पकड़कर बैठ गया। अभी चार दिन मात्र उनकी शादी को हुए थे। घनश्याम की बीबी मर गई थी, दो बच्चे थे, वहीं कमला भी दो बच्चों की विधवा माँ थी। आपस में बच्चे अच्छे से पल जाएँगे, यही सोचकर घनश्याम उसे ब्याह लाया था। लेकिन ये धोखेबाज निकली और चोर भी। कल से वह दुखी होकर नशे में पड़ा है।
राजू ने सलाह दी कि “पुलिस कम्प्लेंन करो”, लेकिन उसने सुना नहीं। वह बहुत लोगों से उधार लेकर बैठा था। बच्चे भी नयी माँ की राह देख रहे थे।
तभी घनश्याम ने उठकर खुद को सम्हाला और बच्चों को बाहर खाना खिलाने ले गया। बच्चों को गले से लगाकर संकल्प किया कि “कल सुबह से काम पर जाऊँगा और धीरे-धीरे सबके पैसे लौटा दूँगा।
“बुझे चेहरे खिल गए थे।

-डॉ अमृता शुक्ला

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