उलझन


आर्यन ने जैसे ही लैपटॉप खोला मेल देखकर उछल पड़ा!
जिस नौकरी का उसे इंतजार था विदेश से इस नौकरी का बुलावा आया था।
“उसे मुंह मांगी मुराद मिल गई।”
माता-पिता भी सुनकर बहुत खुश हुए, इकलौती संतान को इस मुकाम तक लाने में उन्होंने अपनी सभी इच्छाओं को दफन किया था।
तीस दिन बाद ज्वाइनिंग थी, इसी बीच वीजा, पासपोर्ट आदि व्यवस्थाएं करना था।
अचानक पिताजी को दिल का दौरा पड़ा और उनकी सर्जरी करवाना पड़ी, जिसमें मां के जेवर तक बेचना पड़े। आर्यन इसी उलझन में था कि ऐसी स्थिति में अपने बूढ़े माता-पिता को अकेला छोड़कर विदेश कैसे जाए?
वह इसी उलझन में उदास बैठा था, दोस्तों ने कहा- “तू बेवकूफ है जो लाखों रुपए का पैकेज छोड़कर रहा है” पर आर्यन का दिल था जो कहता था “माता-पिता ने तेरे लिए क्या नहीं किया? उन्हें किसके भरोसे छोड़कर जाएगा” और तभी उसने निर्णय लिया नौकरी तो बहुत मिल जाएगी पर माता-पिता बार-बार नहीं मिलेंगे और उसने अपना ज्वाइनिंग लेटर फाड़ कर फेंक दिया।

-कीर्ति प्रदीप वर्मा

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