उलझन

टीना के घरवालों के हालात ठीक ठाक थे। टीना देखने में सुन्दर थी। दो बहनें बस थीं भाई नहीं था इसलिये नकचढी हो गई थी, जो मुँह से कह आया वो होना चाहिए।
बचपन से ही उसने अपना स्वभाव बना लिया था। अब उसकी शादी के दिन करीब थे उसने अपने पसंद के लडके से ही शादी करने का पूरा मन बना लिया माँ बाप ने समझाया मगर…. एक बार मिल लो कह कर सभी को मना लिया।
सभी सब को सर्विस लडका ठीक ही लगा शादी तय कर दी गयी।
शादी के दिन नजदीक आ रहे थे। टीना रंगीले सपने बुन रही थी।
पापा से कहती होटल बढिया से बढिया होनी चाहिए शादी एक बार होती है बार बार नहीं होती। ईवेंट वाले को बुलाओ, सजावट मे कोई समझोता नहीं होना चाहिए। खाना बढिया होना चाहिये सभी याद रखें।
टीना अपने पसंद का ही सब करवा रही थी।सोना चांदी भी भारी वजन के लेना माँ कुछ बोले तो मुँह फुलाकर बैठ जाना, माँ को लगता भाव आसमान छू रहा है थोडे हल्के ले लो मगर….. कहाँ मानने वाली थी।
रिस्तेदार दो सुन्दर आंगूठी दिखाने लाये जो चाहिये तो ले लो टीना…. मुझे तो दोनों अच्छी लग रही दोनों पहन ली। इस तरह से बहुत सी बातें होती रहीं… आखिर शादी हो ही गयी।
कहीं न कहीं मन मे ये बात खटकती रही
आजकल लडकियां ही खुद नहीं समझती….उनको लगता है जितना ले सको ले लो….. माँ बाप का दिल भी पसीज जाता है चलो दे दो…. मगर अजीब सी उलझन है समाज में भयावह रूप ले रही है। दिखावा फैशन, नाच गाने की होड मे चाहे माँ बाप कर्जे में डूब जायें….. उनको अपनी फोटो वाहवाही से मतलब है।
एक तरह से शादियां एक दिखावा बनकर रह गयीं हैं रीति रिवाज़,संबंध सब सिकुड़ गये हैं दिखावा फैशन या यूं कहें नंगापन बढता ही जा रहा है…. देखकर लगता है कि समाज नीचे गर्त में जा रहा है इसके लिए कुछ हद तक लडकियां स्वयं ही जिम्मेदार हैं।

-अर्चना कटारे
शहडोल (म.प्र.)

1 कमेंट

  • Pradeep Kumar Arora 9425192297

    शानदार 👌

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