एक साइकिल तीन दोस्त !
जब हॅंसते हुए चलाते।
अपनी दोस्ती की मिसाल संग,
प्यार सभी का पाते।
जन्मदिन में साइकिल वह,
उपहार मिली मोहन को।
लेकिन सीट पर अमित है बैठा,
फिरोज भी संग में देखो।
दोनों दोस्तों को साइकिल पर बैठा,
मोहन साइकिल संभाले।
अपनी दोस्ती संग खुशियों का रिश्ता,
वो तीनों पहचाने।
बचपन की इस प्यारी दोस्ती में ,
साइकिल भी साथ है देती।
प्यारा बचपन प्यारी साइकिल,
मुस्कान सदा ही देती।
-सीता गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
