फिज़ूल की बातों में समय न व्यर्थ करना चाहिए,
शब्द छोटे हों भले,मगर भाव गहरे होना चाहिए!
अपनी बातों को कम शब्दों में कहना आना चाहिए,
अपनी भावनाओं को,दूसरों तक पहुँचाना एक कला होनी चाहिए!
अतिशयोक्ति पूर्ण बातें सुनने में अच्छी ज़रूर लगती हैं,
पर दिल में वो गहरी छाप नहीं छोड़ती हैं!
बातों में मिठास इतनी हो कि बहुत कुछ कहे बिना ही,
सामने वाला हमारी अभिव्यक्ति को समझ सके!
हमारे कहे हर छोटे से छोटे शब्द,
किसी दिल की गहराई में उतर सकें!
-अदिति रूसिया
वारासिवनी

1 कमेंट
सच कहा👌