(मनहरण घनाक्षरी काव्य)
जब करोगे संघर्ष,होता रहेगा उत्कर्ष।
मुफ्त की आशाएं छोड़ो,मिलेगी सफलता।
पीड़ाओं से भरा जहां,उससे भागोगे कहां।
दृढ़ संकल्प करना,मिलेगी सफलता।
आत्मविश्वास न खोना,कांटों पे हमें चलना।
मंजिल दूर ही सही,मिलेगी सफलता।
आत्मनिर्भर बनना,मुश्किल नहीं है पाना।
टूटे ना हौसला कभी,मिलेगी सफलता।
मिटे मन का अंधेरा,जवाब देंगे करारा।
कोशिशें हारती नहीं,मिलेगी सफलता।
मन का दीप वो जलें,मिट जायेंगे फासलें।
राह तेरी राहगीर,मिलेगी सफलता।
गमों को मत भूलाना,हर हाल में जीतना।
देखेंगे वो भी तुझको,मिलेगी सफलता।
जब करोगे संघर्ष,होता रहेगा उत्कर्ष।
जीत का यही निष्कर्ष,मिलेगी सफलता – –
-प्रा.गायकवाड विलास
मिलिंद महाविद्यालय लातूर
