“हास्य-व्यंग्य”
कितने लगा लो आंवला रीठा
और लगा लो प्याज
कढ़ाई में काला कर लो
ऐलोविरा मैथी
फुला दो सारी रात
गुड़हल फूल कलोंजी मिला दो
कर लो काले हाथ
अर्चना अपना अनुभव कहती
डाई बिना न बने बात
सर्दी हो जाती जुकाम हो जाती
छींको सारी रात
सौ बात एक बात है सुन लो
डाई बने न बात
डाई लगाओ तो बाल झड़ते
खोपड़ी दिखती साफ
रहती इसी उधेड़ बुन में
कौन समझे हमारी बात
अर्चना कटारे
शहडोल (म. प्र.)
