उत्तरदायित्व

चार बहुयें

रामनारायण के चार बेटे थे । सबसे बड़े बेटे की पत्नी जब उस घर में ब्याह कर आई तो उसने अपने छोटे देवरों को अपने पुत्रों के समान स्नेह दिया । सास ससुर के प्रति भी अपने सभी कर्तव्यों का सहर्ष पालन किया । अपने लिए समय क्या होता है उसने कभी न जाना । जैसा उसका नाम वैसे ही उसके गुण । उसका नाम संतोषी था ।
संतोषी के देवर बड़े हुए उनकी भी पत्नियां आईं लेकिन किसी ने भी संतोषी के किसी भी काम को , दिन -भर जो वह चूल्हा -चौकी में घुसी रहती थी अपने हाथ में लेने की कोशिश न की और न ही किसी ने हाथ बटाने का सोचा । जिसका जितना मन होता करती या न करतीं ,उनसे कोई कुछ कहने वाला नहीं था । संतोषी तो ख़ैर क्या अपने मुंह से कहती , सास ने भी न सोचा कि वह चारों बहुओं को काम का बंटवारा कर दें ।
संतोषी के मायके में शादी पड़ी । उसके भाई की शादी थी तो वह एक महीने से पहले वापस नहीं आने वाली थी । संतोषी के जाते अगली ही सुबह घर में अव्यवस्था फैल गई क्योंकि बाकी तीन ने कभी अपने उत्तरदायित्व नहीं समझे थे और न ही कभी सास ने उन्हें उनके उत्तरदायित्व समझाये थे ॥

-ख़ुशी प्रयागराज

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