तुम्हारा तुमको है अर्पण,
मेरा क्या है, हे भगवन।
सिर पर तुमने हाथ रखा है,
बीत जाएगा यह जीवन।
सुख के रास्ते जल्दी कटते,
संघर्ष झेलें गाते-हॅंसते।
जब भी देंखे छवि प्यारी सी,
कहती आंखें कजरारी सी।
पा लेते खुशियों का कंचन।
बीत जाएगा यह जीवन।
तुम्हारा तुमको है अपर्ण।1।
कर्तव्य को पूरा करते जाएँ,
आडम्बर से ध्यान हटाऍं।
वो बसे सृष्टि के सृजन में,
वो कानन में, वो उपवन में।
उससे जोड़े अपना मन।
बीत जाएगा यह जीवन।
तुम्हारा तुमको है अर्पण।2।
क्या है खोना और क्या पाना,
किसको किसके साथ है जाना।
जीवन क्षणिक माटी के जैसा,
साथ न जाएगा घर और पैसा।
देर-सवेर देखो सच का दर्पण।
बीत जाएगा यह जीवन,
तुम्हारा तुमको है अर्पण।3।
-डाॅ अमृता शुक्ला
