कुंडलिया छंद
जग में सबके ईश हैं, प्रतिपल सुनते टेर।
जीवन के सब काज वे, करते देर-सबेर।।
करते देर-सबेर,भरोसा प्रभु पर रखिए।
श्री हरि नाम उचार,धैर्य से मधु फल चखिए।।
होना नहीं उदास, सुमिर प्रभु हैं पग-पग में।
छोड़ समस्या सर्व,निवारण सबका जग में।।
लिखना देर-सबेर से, सत्य करो आभास।
जीवन निर्णय आपका, पथ बढ़ना विश्वास।।
पथ बढ़ना विश्वास, सुनहरा हर पल मानो।
आलस छोड़ प्रमाद,समय की गति पहचानो।
सत्कर्मों के शौर्य, चमकती किरणें दिखना।
चित्त जागरण नित्य,सदा सच्चाई लिखना।।
-अमिता रवि दुबे
छत्तीसगढ़
