घड़ी भर को चले आओ लेलो हर खुशी मेरी
अगर बदले में चाहो ले लो सारी जिंदगी मेरी
मैं अपने दिल के हाथों हर घड़ी मजबूर रहती हूँ
खिलेंगे फूल कल गुलशन में लेलो वह कली मेरी
दुआएँ उनके दर से जाके मेरी लौट आई हैं
न जाने ठोकरें क्यों खा रही हैं बंदगी मेरी
हमारा हाल जैसा है अगर वह रह गया वैसा
हमारी जान ले लेगी किसी दिन आशकी मेरी
हमारे बाद शबनम याद ये दुनिया करेगी ही
किसी दिन रंग लाएगी जहाँ में शायरी मेरी।
शबनम मेहरोत्रा
कानपुर
